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| जवा में अपनी ही सरकार के प्रशासन पर बरसे भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह, 12 घंटे धरने के बाद माने |
रीवा/जवा - सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और लंबे समय से लंबित जनसमस्याओं को लेकर भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने शुक्रवार को जवा जनपद कार्यालय परिसर में धरना देकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। विधायक के धरने पर बैठने की खबर फैलते ही प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी समस्याएं लेकर धरना स्थल पर पहुंच गए। करीब 12 घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद देर रात रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने विधायक से चर्चा की। प्रशासन की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद रात करीब 12 बजे विधायक ने अपना अनशन समाप्त किया।
मिली जानकारी के अनुसार, विधायक दिव्यराज सिंह 14 अगस्त को जवा क्षेत्र में तिरंगा यात्रा सहित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान क्षेत्र की सड़क, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़ी कई समस्याएं उनके सामने आईं। स्थानीय लोगों ने भी अपनी शिकायतें विधायक के समक्ष रखीं। विधायक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से समस्याओं के निराकरण को लेकर जवाब मांगा। बताया गया कि अधिकारियों से मिले जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए धरने पर बैठने का निर्णय लिया।
सिरमौर-डभौरा सड़क की धीमी गति पर नाराजगी
धरने के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दों में सिरमौर-डभौरा सड़क निर्माण में हो रही देरी रहा। विधायक ने सड़क निर्माण की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लंबे समय से निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सड़क की खराब स्थिति और निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण आम लोगों के आवागमन में दिक्कतें सामने आ रही हैं। विधायक ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ देरी के कारणों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। स्थानीय लोगों ने भी सड़क को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की।
स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा
धरने के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायक ने क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा। उनका कहना था कि ग्रामीण आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने भी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक, दवाइयां और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी। विधायक ने इन समस्याओं के जल्द समाधान की जरूरत बताई।
एसडीएम और जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली पर सवाल
धरने का एक प्रमुख मुद्दा सिरमौर एसडीएम और जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली भी रहा। विधायक ने दोनों अधिकारियों को हटाने की मांग प्रशासन के सामने रखी। उनका आरोप था कि क्षेत्र की समस्याओं और आम जनता की शिकायतों के निराकरण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। विधायक ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने विधायक से बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास शुरू किया।
देर रात कलेक्टर से हुई चर्चा
लगभग 12 घंटे तक चले धरने के बाद देर रात रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी धरना स्थल पर पहुंचे और विधायक दिव्यराज सिंह से चर्चा की। बातचीत में विधायक द्वारा उठाई गई मांगों और क्षेत्र की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशासन की ओर से सिरमौर एसडीएम और जनपद सीईओ को बदले जाने को लेकर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा सिरमौर-डभौरा सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने और निर्माण में हो रही देरी के कारणों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद विधायक ने रात करीब 12 बजे अपना अनशन समाप्त कर दिया। इस दौरान समर्थकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी बनी रही।
अब आश्वासन के अमल की परीक्षा
विधायक के धरने के बाद अब क्षेत्र के लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। खासतौर पर सिरमौर-डभौरा सड़क निर्माण में तेजी, स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता और प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर दिए गए आश्वासन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा विधायक का अपनी ही पार्टी की सरकार के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ धरने पर बैठना चर्चा का विषय बना है। हालांकि विधायक ने अपने विरोध को राजनीतिक विवाद के बजाय जनसमस्याओं और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार से जोड़कर रखा।
करीब 12 घंटे चले इस धरने ने जवा क्षेत्र की लंबित समस्याओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि धरना समाप्त होने के बाद प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं। धरना खत्म हो गया है, लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन की है—क्या सड़क तेज बनेगी, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरेगी और अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर वास्तव में कार्रवाई होगी?
