| मंगलवार की जनसुनवाई बनेगी निर्णायक परीक्षा, स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ चतुर्थ एवं अंतिम स्मरण पत्र सौंपने की पूरी तैयारी |
रीवा - आगामी मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई स्वास्थ्य विभाग, रीवा में आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय, ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) तथा निविदा प्रक्रिया से जुड़े कथित गंभीर अनियमितताओं के मामले में निर्णायक मोड़ ले सकती है। आउटसोर्स कर्मचारियों एवं पत्रकार-सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार मिश्रा द्वारा चतुर्थ एवं अंतिम स्मरण पत्र प्रस्तुत किए जाने की पूर्ण तैयारी कर ली गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में दिए गए तीन आवेदनों के बावजूद अपेक्षित एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अब यह अंतिम प्रशासनिक प्रयास किया जा रहा है। यह मामला अब केवल मानदेय के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक धन की पारदर्शिता, श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर विषय बन चुका है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शासन द्वारा निर्धारित मानदेय से कम भुगतान, ईपीएफ एवं ईएसआई अंशदान में कथित अनियमितताएँ तथा टारगेट सिक्योरिटी सर्विसेज की निविदा एवं अनुबंध प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। इन सभी आरोपों की पुष्टि सक्षम एवं स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी।
चतुर्थ एवं अंतिम स्मरण पत्र में मांग की गई है कि टारगेट सिक्योरिटी सर्विसेज की निविदा आमंत्रण से लेकर कार्यादेश, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, भुगतान प्रक्रिया तथा अनुबंध की सभी शर्तों का स्वतंत्र अभिलेखीय परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में हितों के टकराव- नियमों के उल्लंघन अथवा वित्तीय अनियमितताओं के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसी के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि कुछ कर्मचारियों से "सिक्योरिटी कटौती" के नाम पर हस्ताक्षर कराए गए, जबकि ऐसी किसी कटौती का न तो शासन के आदेशों में उल्लेख है, न निविदा की शर्तों में और न ही किसी वैधानिक दिशा-निर्देश में। इसलिए इस पूरे प्रकरण की विधिसम्मत जांच आवश्यक बताई गई है।
स्मरण पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि ईपीएफ एवं ईएसआई से संबंधित सभी दावों का सत्यापन केवल विभागीय अभिलेखों के आधार पर नहीं, बल्कि EPFO, ESIC एवं मध्यप्रदेश शासन के अधिकृत डिजिटल पोर्टलों से कराया जाए, जिससे यदि किसी स्तर पर गलत अथवा भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई हो तो वास्तविक स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सके। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 09 जून, 16 जून और 30 जून 2026 को दिए गए आवेदनों के बाद भी न तो स्वतंत्र जांच की स्थिति स्पष्ट की गई और न ही शिकायतों के निराकरण की कोई ठोस जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसी कारण अब आगामी मंगलवार को जनसुनवाई में चतुर्थ एवं अंतिम स्मरण पत्र सौंपकर समयबद्ध एवं निष्पक्ष कार्रवाई की औपचारिक मांग की जाएगी।
यदि इसके बाद भी नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती, तो शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL), लोकायुक्त, EPFO, ESIC, श्रम आयुक्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा अन्य सक्षम वैधानिक प्राधिकारियों के समक्ष उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाएंगे। उनका कहना है कि यह किसी प्रकार की चेतावनी नहीं, बल्कि संविधान एवं कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रयोग की वैधानिक सूचना है। अब पूरे जिले की निगाहें आगामी मंगलवार की जनसुनवाई पर टिकी हैं। यह केवल एक आवेदन का विषय नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि प्रशासन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही स्थापित करता है, या फिर यह मामला आगे वैधानिक और न्यायिक मंचों तक पहुँचता है। आने वाला मंगलवार इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।