रीवा में नशे का बढ़ता जाल: छोटी कार्रवाई नहीं, पूरे नेटवर्क का खुलासा कब?

रीवा में नशे का बढ़ता जाल: छोटी कार्रवाई नहीं, पूरे नेटवर्क का खुलासा कब?

रीवा - विंध्य अंचल में नशे के विरुद्ध पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में गांजा, ब्राउन शुगर, नशीली कफ सिरप और अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी तथा आरोपियों की गिरफ्तारी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और पुलिस के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए। लेकिन अब समय आ गया है कि केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नशा तंत्र की जड़ों तक पहुंचने पर भी समान गंभीरता से कार्य किया जाए। जनमानस में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब 100 ग्राम, 200 ग्राम गांजा, ब्राउन शुगर या कुछ बोतल नशीली कफ सिरप बरामद होती है, तो यह सामग्री आखिर किस व्यक्ति से खरीदी गई? इसे किसने उपलब्ध कराया? इसका मुख्य सप्लायर कौन है? यह नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है? यदि प्रत्येक कार्रवाई के बाद सप्लाई चेन का भी खुलासा किया जाए, तो नशे के कारोबार पर कहीं अधिक प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल छोटे स्तर के तस्करों या वाहकों की गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। आवश्यकता उन बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की है, जो वर्षों से युवाओं तक नशा पहुंचाने का माध्यम बने हुए हैं। जब तक वित्तपोषकों, थोक सप्लायरों और संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह अवैध कारोबार किसी न किसी रूप में चलता रहेगा। रीवा संभाग में लगातार हो रही बरामदगियों ने यह संकेत अवश्य दिया है कि नशे का नेटवर्क पहले की अपेक्षा अधिक सक्रिय है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि रीवा जैसे शिक्षण और सांस्कृतिक महत्व वाले जिले का धीरे-धीरे नशे के हब के रूप में चर्चा में आना अत्यंत चिंताजनक है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव युवाओं और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। नशे की लत केवल एक व्यक्ति का जीवन ही नहीं बिगाड़ती, बल्कि परिवार, समाज और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालती है। कई गंभीर अपराधों में भी नशे की भूमिका सामने आती रही है।

नशीली कफ सिरप की तस्करी को लेकर भी समय-समय पर सीमावर्ती क्षेत्रों से आपूर्ति होने की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि अंतरराज्यीय समन्वय को और मजबूत बनाया जाए तथा सप्लाई चेन की गहन जांच की जाए। यदि कहीं अवैध रूप से दवाओं की आपूर्ति या बिक्री हो रही है, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं रीवा विधायक ने पूर्व में सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाली अवैध गतिविधियों के संबंध में अन्य राज्यों के साथ समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा की थी। ऐसे में जनता की अपेक्षा है कि अंतरराज्यीय स्तर पर समन्वित अभियान चलाकर नशे के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार किया जाए।

अब आवश्यकता केवल जब्ती के आंकड़े बढ़ाने की नहीं, बल्कि यह बताने की भी है कि बरामद मादक पदार्थ कहां से आया, किसने उपलब्ध कराया, उसके पीछे कौन-सा गिरोह सक्रिय है और उस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच अंतिम कड़ी तक पहुंचेगी, तभी रीवा और पूरे विंध्य क्षेत्र को नशे के बढ़ते खतरे से स्थायी राहत मिल सकेगी। संपादकीय टिप्पणी: यह लेख सार्वजनिक चर्चा में उठ रहे प्रश्नों और चिंताओं पर आधारित है। किसी व्यक्ति, संस्था या क्षेत्र के विरुद्ध लगाए गए आरोप तभी प्रमाणित माने जाएंगे जब उनकी पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों या न्यायालय द्वारा की जाए।

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