| एमपी स्वास्थ्य विभाग में महाफर्जीवाड़ा: एक 'फर्जी' डॉक्टर, 3 जिलों में पदस्थापना! राजस्थान के सगे चाचा ने भतीजे के नाम पर हथियाई सरकारी नौकरी |
शहडोल/जयसिंहनगर - मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकासखंड अंतर्गत उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक 'डॉक्टर' पर अपने ही सगे भतीजे के शैक्षणिक दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हथियाने का गंभीर आरोप लगा है।
भतीजे की डिग्री, चाचा की नौकरी!
मिली जानकारी के अनुसार, राजस्थान के रहने वाले असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने जयसिंहनगर थाने पहुंचकर इस महाफर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया। पीड़ित डॉक्टर का आरोप है कि उनके सगे रिश्ते के चाचा ने कथित रूप से उनके असली शैक्षणिक दस्तावेजों और फोटो का दुरुपयोग किया, जबकि पहचान प्रमाणित करने के लिए अपना खुद का आधार कार्ड इस्तेमाल कर लिया। इसी फर्जीवाड़े के दम पर आरोपी चाचा उफरी स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर बनकर मजे से सरकारी वेतन उठा रहा था। हद तो यह है कि आरोपी ने अपने खुद के परिवार को भी गुमराह कर रखा था और उन्हें बताया था कि वह कोटा में एक कोचिंग संस्थान चलाते हैं।
लोकायुक्त जांच में खुलासा: एक शख्स, 3 जिलों में पदस्थ!
यह मामला सिर्फ एक फर्जी नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार एक बहुत बड़े रैकेट से जुड़े होने की आशंका है। लोकायुक्त की शुरुआती जांच में जो सच सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए:
उक्त फर्जी डॉक्टर की एक साथ शहडोल, श्योपुर और खरगोन जैसे तीन दूर-दराज के जिलों में पदस्थापना दर्ज थी।
रिकॉर्ड के अनुसार, वह फरवरी 2023 से खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक में भी पदस्थ था।
सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित तीन अलग-अलग जिलों में एक ही व्यक्ति एक साथ पूर्णकालिक सेवाएं कैसे दे रहा था और तीन जगह से सरकारी खजाने को चूना लगाकर वेतन कैसे ले रहा था? इस खुलासे ने ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (BMOS) और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
जांच की आंच में कई चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद
जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि असली डॉ. महेश चंद शर्मा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और जल्द ही एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग के किन-किन बड़े अधिकारियों और बाबुओं की मिलीभगत से यह 'त्रिकोणीय' फर्जीवाड़ा इतने सालों तक फलता-फूलता रहा? स्वास्थ्य विभाग का यह घालमेल मध्य प्रदेश के इतिहास के सबसे अनोखे और बड़े फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है।