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| रीवा में शिक्षा व्यवस्था को लगा बड़ा बट्टा: पाठ्य पुस्तक निगम के गोदाम से 35 लाख की सरकारी किताबें गायब |
रीवा - जिले में शासकीय स्कूलों के नौनिहालों को निशुल्क बांटी जाने वाली किताबों में एक बड़ा और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। रीवा स्थित मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के डिपो (गोदाम) से करीब 450 से अधिक बंडल सरकारी किताबें रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। शुरुआती विभागीय आकलन के मुताबिक गायब हुई इन किताबों की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 35 से 36 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस महाघोटाले की भनक लगते ही विभाग के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में मामले की लिखित शिकायत स्थानीय चोरहटा थाने में दर्ज कराई गई है, वहीं राजधानी भोपाल से उच्च स्तरीय जांच टीम भी रीवा पहुंच चुकी है।
बाजार में खपाए जाने की आशंका, रिकॉर्ड में बड़ा हेरफेर
लापता हुई ये किताबें कक्षा 1 से 8वीं तक के शासकीय स्कूली बच्चों को मुफ्त वितरण के लिए रखी गई थीं। विभागीय सूत्रों और प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह कोई सामान्य चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। आशंका जताई जा रही है कि डिपो के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से इन किताबों को कबाड़ या खुले बाजार में निजी प्रकाशकों के माध्यम से मोटी रकम में खपा दिया गया है। फिलहाल डिपो में स्टॉक और वितरण के आंकड़ों में भारी विसंगति देखने को मिल रही है।
भोपाल की टीम कर रही भौतिक सत्यापन, पुलिस एक्शन में
मामले की गंभीरता को देखते हुए पाठ्य पुस्तक निगम मुख्यालय, भोपाल से तीन सदस्यीय विशेष जांच दल रीवा डिपो पहुंच गया है। यह टीम गोदाम का सघन भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रही है और पिछले महीनों के आवक-जावक रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटी है। दूसरी ओर, चोरहटा थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिपो में तैनात प्रभारियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जल्द ही इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
