
मऊगंज में अतिथि शिक्षकों का फूटा दर्द: 17 साल से दे रहे सेवाएं, अब भविष्य सुरक्षित करने और भर्ती विसंगतियां दूर करने की मांग
मऊगंज - नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। भर्ती नियमों में बदलाव और विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों के बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। इसी समस्या को लेकर अतिथि शिक्षक समन्वय समिति जिला मऊगंज ने सुनील सिंह (प्रांत अध्यक्ष) के मार्गदर्शन, मदन लाल कुशवाहा, पूर्णानंद शर्मा के निर्देशन और आनंद सिंह के नेतृत्व में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मध्य प्रदेश के आयुक्त के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा है।
17 वर्षों की निष्ठा के बाद भी भविष्य अधर में
ज्ञापन में अतिथि शिक्षकों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले 17 से 18 वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग में पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हर साल स्कूलों का बेहतर परीक्षा परिणाम देने के बावजूद आज भी उनका भविष्य पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है। सरकार की वर्तमान नीतियों के कारण वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
इन कारणों से समाप्त हो रहे हैं अतिथि शिक्षकों के पद
समिति ने प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में कई कारणों से पुराने अतिथि शिक्षकों की पुनः जॉइनिंग नहीं हो पा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
नियमित शिक्षकों के बड़े पैमाने पर हुए स्थानांतरण (तबादले)।
अतिशेष (सरप्लस) शिक्षकों का समायोजन।
नई नियुक्तियां, पदोन्नति (प्रमोशन) और स्कूलों में नई पद संरचना का लागू होना।
इन सभी प्रशासनिक बदलावों के चलते सत्र 2025-26 में पूरी निष्ठा से काम करने वाले अनेक अतिथि शिक्षकों को इस बार बाहर का रास्ता देखना पड़ रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग की तर्ज पर वरीयता देने की मांग
अतिथि शिक्षकों ने सरकार के सामने मांग रखी है कि उच्च शिक्षा विभाग में 'अतिथि विद्वानों' के लिए जो व्यवस्था लागू है, उसी तर्ज पर स्कूल शिक्षा विभाग में भी बाहर हुए अतिथि शिक्षकों को शाला चयन में प्रथम वरीयता (First Preference) दी जाए। इसके साथ ही प्रभावित शिक्षकों के लिए अलग से विशेष काउंसलिंग आयोजित की जानी चाहिए।
ई-अटेंडेंस और अवकाश नियमों में राहत की अपील
समिति ने ज्ञापन के माध्यम से दो अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाई हैं:
90% ई-अटेंडेंस से राहत: जब तक अतिथि शिक्षकों के लिए कोई नियमित अवकाश व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को शिथिल किया जाए। कम उपस्थिति के आधार पर बाहर किए गए शिक्षकों को तत्काल वापस जॉइनिंग दी जाए।
नियमित अवकाश व्यवस्था: अन्य कर्मचारियों की तरह अतिथि शिक्षकों के लिए भी एक सम्मानजनक और नियमित अवकाश नीति लागू की जाए।
अतिथि शिक्षकों ने चेतावनी भरे लहजे में प्रशासन से अपील की है कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इन समस्याओं का शीघ्र अति शीघ्र निराकरण किया जाए, ताकि हजारों परिवारों का भविष्य अंधकार में जाने से बच सके।