वेनेजुएला में भूकंप का तांडव: तड़के आए दो झटकों से दहला देश, आपातकाल घोषित

वेनेजुएला में भूकंप का तांडव: तड़के आए दो झटकों से दहला देश, आपातकाल घोषित

काराकास - वेनेजुएला में गुरुवार तड़के आए दो विनाशकारी भूकंपों ('ट्विन अर्थक्वेक') ने पूरे देश में अभूतपूर्व तबाही मचा दी है। इन बैक-टू-बैक आए जोरदार झटकों के कारण पल भर में सैकड़ों इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक एजेंसी ने एक बेहद डरावना अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस भीषण आपदा में 10,000 से लेकर 1,000,000 (एक लाख) लोगों की मौत होने की आशंका है। देश में तुरंत आपातकाल लागू कर दिया गया है और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी है। इस तबाही ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कुदरत के रौद्र रूप के आगे इंसानी तकनीक और विज्ञान बेबस नजर आते हैं।

वेनेजुएला की इस त्रासदी के बीच, आइए नजर डालते हैं आधुनिक इतिहास के उन 5 सबसे विनाशकारी और जानलेवा भूकंपों पर, जिन्होंने दुनिया का नक्शा बदल दिया:

1. 2004: हिंद महासागर का महाभूकंप और सुनामी

26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इसने इतिहास की सबसे भयानक सुनामी को जन्म दिया, जिसकी ऊंची लहरों ने भारत, श्रीलंका और थाईलैंड सहित 14 देशों में तबाही मचाई। इस आपदा में 2,30,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

2. 1976: चीन का तांगशान भूकंप

चीन के तांगशान में रात के वक्त आए इस भीषण भूकंप ने संभलने का मौका भी नहीं दिया। सरकारी आंकड़ा 2,42,000 मौतों का था, लेकिन अनौपचारिक तौर पर 6,55,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इस घटना के बाद चीन ने अपने निर्माण नियमों (कंस्ट्रक्शन कोड) में बड़े बदलाव किए।

3. 2010: हैती की त्रासदी

हैती की राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने खराब कंस्ट्रक्शन के कारण पूरी राजधानी को मलबे में बदल दिया। इस आपदा में लगभग 1,60,000 से 3,00,000 लोगों की मौत हुई थी, जिससे हैती आज तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है।

4. 2008: चीन का सिचुआन भूकंप

चीन के सिचुआन प्रांत में आए 7.9 तीव्रता के इस भूकंप ने हजारों मासूम बच्चों की जान ले ली थी, क्योंकि कई स्कूल की इमारतें ढह गई थीं। इस हादसे में 90,000 लोगों की मौत हुई थी और पौने चार लाख से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

5. 1970: पेरू का बर्फीला तूफान और महाभूकंप

पेरू में आए 7.9 तीव्रता के भूकंप ने 'माउंट हुआस्करान' पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा तोड़ दिया था। इस मलबे और बर्फीले तूफान ने 'युनगे' जैसे पूरे के पूरे शहर को जिंदा दफन कर दिया, जिससे 70,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

भारत का वो जख्म: 2001 का गुजरात भूकंप

भारत भी भूकंप के इस खौफनाक रूप का गवाह रहा है। 26 जनवरी 2001 को जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, सुबह 8:46 बजे गुजरात का कच्छ और भुज इलाका 7.7 तीव्रता के भूकंप से हिल गया था। लोग नींद से उठ भी नहीं पाए थे कि भुज, अंजार और गांधीधाम जैसे शहर जमींदोज हो गए, जिसमें 20,000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।



Post a Comment

Previous Post Next Post