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| निर्जला एकादशी 2026: व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां, जान लें नियम और दान का महत्व |
नई दिल्ली - सनातन धर्म में सबसे पूजनीय और कठिन माना जाने वाला निर्जला एकादशी व्रत इस साल 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन बिना जल ग्रहण किए पूरी निष्ठा से व्रत रखते हैं, उन्हें साल भर की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन कुछ विशेष कार्यों की सख्त मनाही होती है, जिन्हें करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और व्रत का फल निष्फल हो जाता है।
व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 काम:
चावल का सेवन: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है। इस दिन चावल खाने से पुण्यों का नाश होता है।
तुलसी के पौधे में जल देना: माना जाता है कि एकादशी के दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में तुलसी जी में जल अर्पित करने से उनका व्रत खंडित हो जाता है।
तुलसी के पत्ते तोड़ना: भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल (पत्ते) अनिवार्य हैं, लेकिन इन्हें एकादशी के दिन नहीं तोड़ा जाना चाहिए। पूजा के लिए एक दिन पहले (दशमी तिथि को) ही पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए।
दिन में सोना: एकादशी के व्रत में दिन के समय सोने की मनाही होती है, क्योंकि इससे व्रत भंग माना जाता है। इस समय को प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
क्रोध और विवाद: इस पवित्र दिन पर किसी पर गुस्सा करने, कटु वचन बोलने या वाद-विवाद करने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और घर में दरिद्रता आती है।
इस दिन क्या करें (महत्वपूर्ण नियम और दान):
निर्जला एकादशी के दिन सामर्थ्य के अनुसार दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन भीषण गर्मी में लोगों को जल, मटका (घड़ा), छाता, अनाज और मौसमी फल दान करना अत्यंत शुभ और सुख-समृद्धि प्रदायक माना गया है। श्रद्धालुओं को इस दिन मौन रहकर या मन ही मन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का निरंतर जाप करना चाहिए और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
अस्वीकरण - इस आलेख में दी गई जानकारियां लोक मान्यताओं और ज्योतिषीय शास्त्रों पर आधारित हैं। विस्तृत और प्रामाणिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या योग्य पुरोहित की सलाह अवश्य लें।
