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| रीवा में ‘मेडिकल हब’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ और ‘लूट का साम्राज्य’: नेशनल हॉस्पिटल में आग के बाद हंगामा |
रीवा - विंध्य के सबसे बड़े केंद्र रीवा से एक बार फिर मानवता को शर्मसार और डराने वाली खबर सामने आई है। शहर के नेशनल हॉस्पिटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के बाद जो मंजर दिखा, उसने न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन की संवेदनशीलता की पोल खोल दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यहाँ मरीजों की जान से ज्यादा साख और तिजोरी की परवाह है।
दैनिक भास्कर के कैमरे ने खोली पोल, लाइव कैद हुई गुंडागर्दी
अस्पताल में आग लगने के बाद जान बचाने के लिए बदहवास भागते मरीजों और धुएं के गुबार का वीडियो बनाना नेशनल हॉस्पिटल के संचालक और प्रबंधन को इस कदर नागवार गुजरा कि उन्होंने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं। दैनिक भास्कर की टीम द्वारा कैमरे में कैद किए गए लाइव वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नेशनल हॉस्पिटल के बाहर सरेराह हंगामा, धक्का-मुक्की और मारपीट हो रही है।
आपदा के वक्त मदद करने के बजाय नेशनल हॉस्पिटल प्रबंधन और उनके पाले हुए बाउंसरों ने पीड़ित परिजनों, मरीजों और सच दिखाने वाले मीडियाकर्मियों के साथ जमकर अभद्रता और मारपीट की। कैमरे में कैद ये तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि रीवा में निजी अस्पताल संचालक किस कदर बेलगाम हो चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में निजी माफिया बेलगाम
यह रीवा जिले की कोई पहली और नई घटना नहीं है। विडंबना देखिए कि रीवा जिला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (जिनके पास प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्रालय का अहम प्रभार है) का न सिर्फ गृह ग्राम है, बल्कि उनका विधानसभा क्षेत्र भी है। माननीय मंत्री जी रीवा को 'मेडिकल हब' बनाने का दावा और प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके कार्यकाल में शासकीय अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। सरकारी दावों के उलट, स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में अवैध प्राइवेट नर्सिंग होम और झोलाछाप चिकित्सकों की बाढ़ आ गई है।
इलाज नहीं, ‘अर्थ वृद्धि’ का डकैती तंत्र: 1000% तक महंगी सामग्री
रीवा के नर्सिंग होम में एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने बिल थमाए जा रहे हैं:
सामग्रियों में 1000% तक की वृद्धि: सुई (नीडल), जलको, धागा, पट्टी और रुई जैसी बुनियादी मेडिकल सामग्रियों पर एक हजार प्रतिशत तक बढ़ाकर दाम वसूले जा रहे हैं।
अस्पताल या 'वसूली केंद्र'?: यह व्यवस्था जीवन बचाने का केंद्र नहीं, बल्कि मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर 'अर्थ वृद्धि' (पैसा कमाने) का एक संगठित अभियान बन चुकी है।
यही कारण है कि रीवा में अधिकांश डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों ने मानवता को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। आज स्थिति यह है कि जिसके पास कोई रास्ता या साधन नहीं बचता, वही रीवा में इलाज कराने को मजबूर है; अन्यथा गंभीर मरीज बनारस, नागपुर, प्रयागराज, लखनऊ और जबलपुर का रुख कर रहे हैं।
मदद के लिए नहीं, सर फोड़ने के लिए रखे गए हैं 'बाउंसर'
विंध्य के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में आए दिन लापरवाही और बदइंतजामी की घटनाएं घटती हैं, तो दूसरी तरफ निजी अस्पतालों का हाल और भी खौफनाक है। प्राइवेट अस्पतालों में तैनात बाउंसरों का काम मरीजों की मदद करना या सुरक्षा देना नहीं है। इनका असली काम प्रबंधन की कमियों को दबाना और सच को बाहर आने से रोकना है।
यदि किसी पीड़ित मरीज के परिजन ने अस्पताल की मनमानी, बिलिंग या सुरक्षा में लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की, तो ये बाउंसर उनकी 'विशेष सेवा' करते हैं। उस 'सेवा' में परिजन का हाथ टूट जाए, सर फट जाए या पूरा शरीर लहूलुहान हो जाए, अस्पताल प्रबंधन को कोई फर्क नहीं पड़ता।
मेडिकल स्टोर बने 'अस्पताल', जांच रिपोर्ट में बड़ा खेल
रीवा में स्वास्थ्य क्षेत्र का अराजक स्वरूप देखना हो, तो ग्रामीण अंचलों और शहर की गलियों का रुख कीजिए। अब लगभग हर मेडिकल स्टोर में डॉक्टर बैठकर पर्चियां लिख रहे हैं। बिना किसी विशेषज्ञ के एक्स-रे और पैथोलॉजी लैब खोलकर गंभीर से गंभीर जांचें धड़ल्ले से की जा रही हैं। इन गंभीर जांचों को करने और रिपोर्ट तैयार करने वाला योग्य तकनीशियन कौन है, इसका किसी को अता-पता नहीं है।
सौदेबाजी और समझौते का दौर शुरू, क्या जागेगा प्रशासन?
दैनिक भास्कर के कैमरे में नेशनल हॉस्पिटल की इस शर्मनाक करतूत और जमीनी हकीकत के कैद होने के बाद, हमेशा की तरह पारंपरिक खेल शुरू हो चुका है। जिम्मेदार अधिकारियों, रसूखदारों और अस्पताल प्रबंधन के बीच सौदेबाजी और समझौते की टेबल सज चुकी है। मामले को रफा-दफा करने के प्रयास अंदरखाने जारी हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार संभालने वाले उपमुख्यमंत्री जी अपने ही गृह जिले के इस लाइव वीडियो साक्ष्य को देखने के बाद 'मेडिकल माफिया तंत्र' और गुंडागर्दी पर कोई कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर 'मेडिकल हब' के नाम पर रीवा की जनता यूँ ही लुटती और पिटी जाती रहेगी!
