रायसेन; खाद्य मंत्री ने बिना सूचना उपार्जन केंद्र का किया निरीक्षण, तुलाई व्यवस्था पर सख्त सवाल Aajtak24 News

 रायसेन; खाद्य मंत्री ने बिना सूचना उपार्जन केंद्र का किया निरीक्षण, तुलाई व्यवस्था पर सख्त सवाल Aajtak24 News

रायसेन - मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुधवार को भोपाल से सागर जाते समय अचानक रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।

मंत्री के अचानक पहुंचने से उपार्जन केंद्र में हड़कंप की स्थिति बन गई। उन्होंने सीधे तुलाई, खरीदी प्रक्रिया और भंडारण व्यवस्था की बारीकी से जांच की।

तुलाई और वारदाने का वजन खुद कर जांचा सिस्टम

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने मौके पर ही—

  • वारदाने का वजन
  • भरे गेहूं बोरे का वजन
  • तुलाई प्रक्रिया की पारदर्शिता

की जांच की और अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।

लापरवाही पर सख्त रुख, कर्मचारियों को फटकार

निरीक्षण के दौरान कार्य में हल्की शिथिलता पाए जाने पर मंत्री ने सर्वे कर्मचारियों वसुंधरा गौर और शिवराज लोधी को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि—

 “किसानों के कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

किसानों से सीधा संवाद – व्यवस्था पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

मंत्री ने मौके पर किसानों से बातचीत की।
रंगपुर के किसान किशन गोपी और कैलाश यादव ने बताया कि उन्हें तुलाई और उपार्जन प्रक्रिया में कोई समस्या नहीं हो रही है और काम समय पर हो रहा है।

वेयरहाउस में भी पहुंचकर जांच

इसके बाद मंत्री रतनपुर स्थित प्रेम वेयरहाउस पहुंचे, जहां किसानों ने भी बताया कि उपार्जन प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है और किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—

  • किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो
  • तुलाई और खरीदी समयबद्ध हो
  • पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे
  • ऑटो कनेक्टिविटी प्रणाली को मजबूत किया जाए

यह औचक निरीक्षण साफ संकेत देता है कि सरकार उपार्जन व्यवस्था को लेकर सख्त रुख में है और अब निगरानी केवल कागजों पर नहीं बल्कि सीधे मैदान में उतरकर की जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या औचक निरीक्षण के बावजूद उपार्जन केंद्रों में जमीनी स्तर पर नियमित निगरानी प्रणाली कमजोर है, जो मंत्री को खुद मैदान में उतरना पड़ा?
  2. तुलाई और भंडारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल सिस्टम कितना प्रभावी है, और उसमें गड़बड़ी की गुंजाइश कितनी है?
  3. क्या कर्मचारियों को फटकार लगाने से सिस्टम सुधरता है, या इसके लिए स्थायी प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही तय करना जरूरी है?

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