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| गुना; कूनो के उद्गम पर जल बचाने की शपथ… लेकिन क्या भाषणों से लौट आएंगी सूखती नदियां? Aajtak24 News |
गुना - जिले के ग्राम कंजा तरावटा स्थित कूनो नदी उद्गम स्थल पर गुरुवार को “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” के तहत जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में म.प्र. जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मोहन नागर शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पूजन-अर्चन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई।
अपने संबोधन में मोहन नागर ने जल संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से वर्षा जल संचयन, नदियों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण और जल के सदुपयोग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने और जल की बर्बादी रोकने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि शासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का अभियान जनआंदोलन बन सकता है। संचालन राजाराम धाकड़ ने किया। इस दौरान जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हालांकि जल संरक्षण को लेकर लगातार अभियान और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर कई नदियों, तालाबों और जल स्रोतों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये अभियान केवल प्रतीकात्मक आयोजनों तक सीमित रह जाएंगे या वास्तव में जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए ठोस और स्थायी कार्य भी होंगे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जल संरक्षण अभियानों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, तो अब तक जिले में कितने सूख चुके जल स्रोत वास्तव में पुनर्जीवित हुए हैं?
- क्या जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए गए कार्यों का कोई स्वतंत्र सामाजिक या तकनीकी ऑडिट कराया गया है, ताकि वास्तविक परिणाम सामने आ सकें?
- जब कई क्षेत्रों में अवैध रेत खनन और अतिक्रमण से नदियां प्रभावित हो रही हैं, तो प्रशासन इन पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा?
