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| इंदौर में ‘पानी बचाओ’ सिर्फ नारा नहीं, जनआंदोलन बना—कॉर्पोरेट से लेकर गांव तक जुटा पूरा शहर! Aajtak24 News |
इंदौर - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान इंदौर जिले में अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान के तहत जल संरक्षण और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन में आम नागरिकों से लेकर कॉर्पोरेट सेक्टर तक सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। जिले में पुरानी बावड़ियों, कुओं और जल स्रोतों का न केवल जीर्णोद्धार किया जा रहा है, बल्कि उन्हें सौंदर्यीकृत कर फिर से उपयोगी बनाया जा रहा है। अभियान की समीक्षा बैठक कलेक्टर श्री शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें जिला पंचायत सीईओ श्री सिद्धार्थ जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि कई बड़ी संस्थाएं इस अभियान से जुड़ चुकी हैं। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा 15 बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जबकि ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था 10 कुओं के पुनरुद्धार में सहयोग कर रही है। इसके अलावा विभिन्न संगठनों द्वारा हजारों पौधारोपण, रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के सहयोग से तालाबों के गहरीकरण और जल संग्रहण कार्य भी तेज गति से जारी हैं। अब तक अमृत सरोवर अभियान के तहत 101 तालाब, पुष्कर धरोहर समृद्धि अभियान में 392 कार्य और जल गंगा संवर्धन अभियान में 713 संरचनात्मक कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
इस वर्ष भी अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं—ग्रामीण क्षेत्रों में 5,000 और शहरी क्षेत्रों में लगभग 25,000 जल संरक्षण कार्य प्रस्तावित हैं। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य बरसात से पहले पूरे किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तालाबों और जल संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। इसके साथ ही उन्होंने सभी शासकीय भवनों, पीएम आवास योजनाओं और श्मशान घाटों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या कॉर्पोरेट सेक्टर की भागीदारी केवल CSR गतिविधि तक सीमित है, या इसकी दीर्घकालिक जिम्मेदारी भी तय की गई है?
- हजारों कार्यों का लक्ष्य तय होने के बावजूद, क्या उनकी गुणवत्ता और रखरखाव के लिए कोई स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद है?
- पुराने तालाब और बावड़ियों के पुनर्जीवन के बाद उनका वास्तविक उपयोग और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए क्या कोई स्पष्ट नीति है या यह केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित है?
