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| भोपाल; “सिलाई से सपनों तक सफर: भोपाल में जरी-जरदोजी और टेक्सटाइल बनेगा रोजगार का नया इंजन” Aajtak24 News |
भोपाल - जिले में स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन की दिशा में प्रशासन ने नई पहल तेज कर दी है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित जिला निर्यात कार्ययोजना (District Export Action Plan) की समीक्षा बैठक में टेक्सटाइल और पारंपरिक शिल्प क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जरी-जरदोजी जैसे पारंपरिक शिल्प में रोजगार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर रोजगार मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
इसके साथ ही टेक्सटाइल सेक्टर को आधुनिक कौशल से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि जिले के आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजों को उद्योगों के साथ जोड़ने के लिए एमओयू (MoU) कौशल विकास साझेदारी किए जाएं, ताकि युवाओं को सीधे उद्योग आधारित प्रशिक्षण मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच यह समन्वय युवाओं को बाजार की जरूरतों के अनुसार दक्ष बनाएगा, जिससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि जिले के निर्यात को भी नई दिशा मिलेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए रणनीति को और मजबूत किया जाएगा, जिससे भोपाल की अर्थव्यवस्था को नई गति मिले।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या जरी-जरदोजी जैसे पारंपरिक कारीगरों के लिए कोई स्थायी मार्केट लिंक या निर्यात चैनल वास्तव में तैयार किया गया है, या यह योजना केवल कागजों तक सीमित है?
- आईटीआई और उद्योगों के बीच MoU के बाद क्या छात्रों को वास्तविक प्लेसमेंट और रोजगार की गारंटी मिलती है, या प्रशिक्षण के बाद भी वे बेरोजगार रह जाते हैं?
- स्थानीय उत्पादों के निर्यात बढ़ाने के लिए क्या कोई स्पष्ट टारगेट और टाइमलाइन तय की गई है, या यह केवल सामान्य दिशा-निर्देश हैं?
