बस्तर; सरकारी योजनाएं अब ‘लाइन’ नहीं, ‘लाइव’: बस्तर के गांवों में कैंप लगाकर सीधा लाभ Aajtak24 News

बस्तर; सरकारी योजनाएं अब ‘लाइन’ नहीं, ‘लाइव’: बस्तर के गांवों में कैंप लगाकर सीधा लाभ Aajtak24 News

जगदलपुर - बस्तर संभाग में अब सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। “बस्तर मुन्ने” और “नियद नेल्लानार योजना 2.0” के तहत 1 मई से ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन शुरू हो गया है, जिनके जरिए योजनाओं को सीधे गांव तक पहुंचाने की पहल की जा रही है। एनसीएईआर सर्वे के आधार पर बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, कोण्डागांव और सुकमा जिलों में पात्र हितग्राहियों की पहचान कर योजनाओं का सेच्युरेशन किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।

बस्तर जिले के अलग-अलग विकासखंडों—लोहांडीगुड़ा, बकावंड, जगदलपुर, दरभा, तोकापाल और बस्तर—के कई ग्राम पंचायतों में ये शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में मौके पर ही दस्तावेजों की जांच, पात्रता निर्धारण और योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीम पूरी तरह सक्रिय है। अनुविभागीय दंडाधिकारी से लेकर ब्लॉक और मैदानी स्तर के अधिकारी शिविरों में मौजूद रहकर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

इस अभियान के तहत 31 व्यक्तिमूलक योजनाओं का सेच्युरेशन, 14 सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार और 10 अन्य योजनाओं में अधिकतम लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का दावा है कि इस पहल से अंतिम छोर तक बसे ग्रामीण भी मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविरों में पहुंचें और शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई पारदर्शी सिस्टम है जिससे यह ट्रैक किया जा सके कि शिविरों में लाभ पाने वाले हितग्राही वास्तव में पात्र हैं या नहीं?
  2. शिविर खत्म होने के बाद अगर किसी ग्रामीण को योजना का लाभ नहीं मिलता, तो उसकी शिकायत और समाधान के लिए क्या ठोस व्यवस्था होगी?
  3. क्या इन योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र एजेंसी या थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था की जाएगी?

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