शिवपुरी; रात के अंधेरे में गांव की गलियों तक पहुंचे कलेक्टर, चौपाल में बैठकर ‘मौके पर फैसला Aajtak24 News

शिवपुरी; रात के अंधेरे में गांव की गलियों तक पहुंचे कलेक्टर, चौपाल में बैठकर ‘मौके पर फैसला Aajtak24 News

शिवपुरी - शिवपुरी जिले में प्रशासन ने जमीनी स्तर पर सक्रियता का अनोखा उदाहरण पेश किया, जब कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने पोहरी जनपद की ग्राम पंचायत एसवाया के अहेरा और मुड़खेड़ा गांव में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। कलेक्टर ने ग्रामीणों से पानी, बिजली, सड़क, राशन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। कई शिकायतें पेयजल संकट, जर्जर सड़कों, बिजली आपूर्ति में अनियमितता और राशन वितरण में देरी से जुड़ी थीं।

चौपाल के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर ही कार्रवाई के आदेश दिए, जिसके चलते कई मामलों का तत्काल निराकरण भी किया गया। गांव में पहुंचने पर कलेक्टर ने बच्चों से भी संवाद किया और शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्हें नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर स्वयं मौके पर उस स्थान पर पहुंचे जहां सड़क (खरंजा) की मांग की गई थी। रात्रि में ही स्थल निरीक्षण कर उन्होंने संबंधित विभाग को तत्काल सड़क निर्माण के निर्देश दिए।

इसी दौरान ग्राम मुड़खेड़ा में आंगनबाड़ी केंद्र में भोजन वितरण में अनियमितता की शिकायत सामने आई। ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने भोजन वितरण करने वाले समूह को तत्काल हटाने के निर्देश जारी किए। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ श्री विजय राज और एसडीएम अनुपम शर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कई समस्याओं का मौके पर समाधान किया, जबकि शेष मामलों में समयसीमा तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब ग्रामीण आज भी पानी, सड़क और राशन जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो क्या यह प्रशासनिक निगरानी की लगातार विफलता नहीं है?
  2. रात्रि चौपाल में मौके पर समाधान दिखाया गया, लेकिन क्या ऐसे निर्देश पहले भी दिए गए थे और उनका फॉलोअप क्यों नहीं हुआ?
  3. आंगनबाड़ी में अनियमितता की शिकायत सामने आने पर सीधे समूह हटाया गया—क्या इससे पहले इसकी मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल माना जाए?

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