| एमसीबी; खेती बदलेगी तो गांव बदलेगा: मुर्किल के किसानों को मिला आधुनिक खेती का मंत्र Aajtak24 News |
एमसीबी - खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच भरतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मुर्किल में आयोजित “विकसित संकल्प अभियान खरीफ 2026” के कृषि जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर में किसानों को आधुनिक खेती और बेहतर उत्पादन के तरीके बताए गए। शिविर का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाना रहा। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, बीज चयन, समय पर बीज उपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग, फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक खेती को अपनाने और लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और खेती से जुड़े व्यवहारिक सुझाव दिए। किसानों को यह भी बताया गया कि शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेकर वे अपनी आय और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत मुर्किल के सरपंच लखन प्रताप सिंह सहित कृषि विभाग के अधिकारियों और तकनीकी टीम की उपस्थिति रही। विशेषज्ञों ने मौसम आधारित खेती, फसल सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी किसानों को मार्गदर्शन दिया।
शिविर में कुल 30 किसानों ने भाग लिया, जिनमें महिला किसानों की भी सहभागिता रही। बड़ी संख्या में आदिवासी कृषकों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों को लेकर रुचि बढ़ रही है। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी पहल से नई जानकारी सीधे गांव तक पहुंचती है और खेती को अधिक वैज्ञानिक तरीके से करने में मदद मिलती है। प्रशासन ने बताया कि विकसित संकल्प अभियान के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर और उन्नत कृषि की दिशा में लगातार जोड़ा जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- आधुनिक खेती और नई तकनीक की जानकारी दी जा रही है—क्या किसानों को इसके लिए आवश्यक संसाधन और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी?
- शिविर में केवल 30 किसानों की भागीदारी दर्ज हुई—क्या इतनी सीमित पहुंच से व्यापक कृषि बदलाव का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा?
- प्राकृतिक खेती और उन्नत कृषि को बढ़ावा देने की बात की गई—क्या इसके परिणामों और किसानों की आय में वास्तविक बदलाव का कोई जिला स्तर पर आकलन किया जा रहा है?