दतिया; बरसात से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन: नाले-नालियों की सफाई में ढिलाई पर सीधे कार्रवाई Aajtak24 News

दतिया; बरसात से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन: नाले-नालियों की सफाई में ढिलाई पर सीधे कार्रवाई Aajtak24 News

दतिया - दतिया में आगामी मानसून को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सोमवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में स्वप्निल वानखड़े ने सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (CMO) को स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश से पहले नाले-नालियों की सफाई और अतिक्रमण हटाने का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जाए, ताकि जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

बैठक से पहले कलेक्टर ने जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किए गए जिला स्तरीय आधिकारिक व्हाट्सऐप चैनल का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन और जनता के बीच सूचना आदान-प्रदान को तेज और पारदर्शी बनाएगी। अब नागरिकों को योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों की प्रमाणिक जानकारी सीधे मिल सकेगी। बैठक में कलेक्टर ने खाद की उपलब्धता, गेहूं उपार्जन, जल शक्ति अभियान, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने नल-जल योजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा करते हुए बंद पड़ी योजनाओं को शीघ्र पुनः शुरू करने के निर्देश दिए।

राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण जैसे लंबित मामलों में तेजी लाने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि इन कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। वहीं स्वामित्व योजना, फार्मर रजिस्ट्री और जनगणना कार्य की प्रगति पर भी समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों पर जुर्माना लगाने और सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का त्वरित व संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अक्षय कुमार तेम्रवाल, अपर कलेक्टर महेन्द्र सिंह कवचे, संयुक्त कलेक्टर श्रृति अग्रवाल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल मानसून से पहले नाले-नालियों की सफाई के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन फिर भी शहरों में जलभराव क्यों हो जाता है—क्या निगरानी प्रणाली कमजोर है?
  2. अतिक्रमण हटाने के आदेश तो जारी होते हैं, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि बार-बार अतिक्रमण दोबारा कैसे बन जाते हैं और जिम्मेदारी किसकी तय होती है?
  3. सीएम हेल्पलाइन और लंबित प्रकरणों पर जुर्माने की बात होती है, लेकिन क्या इससे वास्तविक सुधार होता है या यह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है?

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