उमरिया; चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो’: माहवारी पर शुरू होगी जागरूकता की नई पहल Aajtak24 News

उमरिया; चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो’: माहवारी पर शुरू होगी जागरूकता की नई पहल Aajtak24 News

उमरिया - माहवारी स्वच्छता को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और किशोरियों एवं महिलाओं को सही जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में 28 मई से स्वच्छ माहवारी दिवस के अंतर्गत विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत विभिन्न स्तरों पर जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्ही.एस. चंदेल की अध्यक्षता में जिला चिकित्सालय सभाकक्ष में आयोजित कन्वर्जेंस बैठक में अभियान की रूपरेखा पर चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस पहल का उद्देश्य माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर परामर्श सुविधा उपलब्ध कराना है। 28 मई से 30 मई तक जिले के विभिन्न गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिर तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, परामर्शदाता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा दर्शन महिला कल्याण समिति के प्रशिक्षकों की भागीदारी रहेगी।

बैठक में जिला किशोर स्वास्थ्य समन्वयक द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन से जुड़ी जानकारी साझा की गई। “चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो” विषय पर चर्चा करते हुए यह रेखांकित किया गया कि माहवारी पर खुलकर संवाद न होने का असर किशोरियों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक जीवन पर पड़ सकता है। शिक्षा विभाग से उपस्थित विनीत कुमार केवट ने बताया कि स्कूल सत्र शुरू होने पर जीवन कौशल आधारित गतिविधियों के साथ इस अभियान को भी जोड़ा जाएगा।

नोडल अधिकारी डॉ. संदीप सिंह ने सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया। साथ ही 31 मई को मनाए जाने वाले विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के संबंध में भी समुदाय को जागरूक करने की बात कही गई।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिले में माहवारी स्वच्छता पर जागरूकता अभियान पहले भी चलते रहे हैं—क्या इनके प्रभाव को मापने के लिए कोई डेटा या मूल्यांकन उपलब्ध है?

2. क्या जागरूकता कार्यक्रमों के साथ किशोरियों को सस्ती या निःशुल्क माहवारी स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराने की भी कोई ठोस व्यवस्था की गई है?

3. ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सामाजिक झिझक अधिक है, वहां परिवारों और पुरुष सदस्यों को इस अभियान से जोड़ने की क्या रणनीति है?

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