रीवा; अन्नदाता पर चौतरफा मार: व्यवस्थाओं की बदहाली और भ्रष्टाचार ने रीवा के किसानों को किया बेहाल Aajtak24 News

रीवा; अन्नदाता पर चौतरफा मार: व्यवस्थाओं की बदहाली और भ्रष्टाचार ने रीवा के किसानों को किया बेहाल Aajtak24 News

रीवा - एक ओर प्रकृति की अनिश्चितता और दूसरी ओर प्रशासनिक कुप्रबंधन; इन दोनों पाटों के बीच आज रीवा जिले का किसान बुरी तरह पिस रहा है। वर्ष 2026 की गेहूं खरीदी प्रक्रिया किसानों के लिए सुगम होने के बजाय एक 'दुस्वप्न' साबित हो रही है। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई ने अन्नदाता को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है।

स्लॉट बुकिंग और बारदाने का 'कृत्रिम' संकट?

गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि छोटे से लेकर बड़े काश्तकारों तक, किसी के भी 'स्लॉट' बुक नहीं हो पा रहे हैं। पोर्टल की तकनीकी खामियों और स्थानीय अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी ने किसानों को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है। इसके साथ ही, 'बारदाने' (बोरे) का अभाव कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। खरीदी केंद्रों पर खाली बारदाने न होने के कारण तुलाई रुकी हुई है, जिससे हज़ारों क्विंटल अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है।

आर्थिक बोझ: किराए में ही खर्च हो रही जमा-पूंजी

मजबूरी में किसान ट्रैक्टर किराए पर लेकर केंद्रों के बाहर डेरा डाले हुए हैं। एक ट्रैक्टर का किराया लगभग 1000 रुपये प्रतिदिन पड़ रहा है। कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी जब तुलाई का नंबर नहीं आता, तो किसान की मेहनत की कमाई केवल ट्रैक्टर के किराए और भोजन में खर्च हो रही है। यदि यही स्थिति रही, तो किसान कर्ज के दलदल में फंसकर भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।

कतारों में सिमटा किसान का जीवन

किसान के जीवन का हर चरण अब लंबी कतारों और अभावों की भेंट चढ़ गया है:

  • जुताई-बुवाई: डीजल का संकट और खाद-बीज की कालाबाजारी।

  • सिंचाई-कटाई: बिजली की भारी कटौती और फिर डीजल की किल्लत।

  • बिक्री: मंडी में स्लॉट का न होना और खरीदी केंद्रों पर कुप्रबंधन।

कलेक्टर पर भरोसा, पर निचले अमले से भारी निराशा

रीवा जिले के वर्तमान कलेक्टर की कार्यशैली और ईमानदारी के प्रति जनता का विश्वास अभूतपूर्व है। जिले के इतिहास में उनकी छवि एक संवेदनशील प्रशासक की बनी है, लेकिन जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारी और बिचौलिए इस साख पर बट्टा लगा रहे हैं। किसानों का स्पष्ट मानना है कि:

"कलेक्टर साहब की मंशा साफ है, लेकिन निचले स्तर का प्रशासनिक अमला और खरीदी केंद्रों के प्रभारी पूरी तरह निष्क्रिय और भ्रष्ट बने हुए हैं।"

निष्कर्ष और मांग

रीवा के किसानों ने इस समाचार के माध्यम से जिला कलेक्टर का ध्यान आकर्षित करते हुए कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. पारदर्शिता: स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को तत्काल पारदर्शी बनाया जाए।

  2. सप्लाई चेन: खरीदी केंद्रों पर बारदाने की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

  3. कठोर कार्रवाई: कार्य में लापरवाही बरतने वाले स्थानीय कर्मचारियों और केंद्र प्रभारियों पर सख्त कार्रवाई हो।



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