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| सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ते कदम; जिले में 99% संस्थागत प्रसव का रिकॉर्ड Aajtak24 News |
कवर्धा - छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मातृत्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता के चलते अब जिले में लगभग 99 प्रतिशत प्रसव शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित रूप से संपन्न हो रहे हैं। इस उपलब्धि ने न केवल मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी जगाया है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान: हर माह की 9 और 24 तारीख
जिले में गर्भवती माताओं की स्वास्थ्य जांच के लिए प्रत्येक माह की 09 एवं 24 तारीख को विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान चिन्हांकित केंद्रों पर प्रसव पूर्व जांच (ANC), रक्त एवं पेशाब की जांच और निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (High Risk Pregnancy) की समय रहते पहचान करना है, ताकि प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं को शून्य किया जा सके।
संस्थागत प्रसव पर मिल रही आर्थिक सहायता
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रशासन द्वारा संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रामीण महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत एम्बुलेंस, दवाइयां, भोजन और ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी तमाम सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क दी जा रही हैं।
उच्च जोखिम मामलों पर विशेष निगरानी
मातृत्व स्वास्थ्य नोडल अधिकारी डॉ. जीतेन्द्र वर्मा के अनुसार, उच्च रक्तचाप, गंभीर एनीमिया, मधुमेह और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामलों को 'उच्च जोखिम' की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में जिला चिकित्सालय में प्रसव कराने की सलाह दी जाती है ताकि सी-सेक्शन (सिजेरियन) की जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर तुरंत उपलब्ध रहें। दूरस्थ क्षेत्रों की माताओं को संभावित प्रसव तिथि से 8-10 दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती करने की सुविधा भी दी जा रही है।
भय दूर करने के लिए 'प्रसव कक्ष' का भ्रमण
पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के मन से प्रसव का डर दूर करने के लिए एक अनूठी पहल की जा रही है। उन्हें प्रसव पूर्व जांच के दौरान अस्पताल के प्रसव कक्ष (Labour Room) का भ्रमण कराया जाता है और मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। साथ ही, 'माहवारी सर्विलांस कार्यक्रम' के जरिए नए गर्भधारण के मामलों की ट्रैकिंग भी की जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का प्रमाण यह है कि यहाँ की 45 स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक स्तर (National Quality Assurance Standards) पर प्रमाणित किया जा चुका है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या सुझाव के लिए 104 टोल फ्री नंबर का उपयोग करें।
