| गौरेला-पेंड्रा; 75% श्रवण बाधित, पिता का साया भी छूटा… लेकिन हार नहीं मानी: झुग्गी से उठकर पूजा साहू ने पास की NET परीक्षा |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - कई बार संसाधनों की कमी और कठिन परिस्थितियां लोगों के सपनों को सीमित कर देती हैं, लेकिन कुछ कहानियां यह साबित करती हैं कि परिस्थितियां हमेशा अंतिम फैसला नहीं करतीं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी सामने आई है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से, जहां आर्थिक अभाव और दिव्यांगता के बावजूद एक युवती ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता हासिल कर नई मिसाल पेश की है। वार्ड क्रमांक 1 सिंचाई कॉलोनी सारबहर स्थित स्मृति वाटिका क्षेत्र में रहने वाली कुमारी पूजा साहू ने समाजशास्त्र विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
झुग्गी से पढ़ाई, कठिन हालात के बीच नहीं टूटा हौसला
पूजा साहू 75 प्रतिशत श्रवण बाधित हैं। पारिवारिक परिस्थितियां भी उनके पक्ष में नहीं रहीं। लगभग नौ वर्ष पहले उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। बताया गया कि उनकी माता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पूजा ने पढ़ाई नहीं छोड़ी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने समाजशास्त्र विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की पढ़ाई पूरी करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा में सफलता हासिल की।
अब लक्ष्य पीएचडी, सहायता के लिए पहुंचीं समाज कल्याण विभाग
एनईटी में सफलता के बाद पूजा साहू ने आगे शोध और उच्च शिक्षा जारी रखने की इच्छा जताई है। इसी उद्देश्य से उन्होंने पीएचडी अध्ययन हेतु सहायता राशि उपलब्ध कराने के संबंध में समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया। विभाग द्वारा उनके आवेदन पर प्रक्रिया शुरू की गई और उनकी परिस्थितियों का प्रतिवेदन तैयार करने के लिए उनके निवास का निरीक्षण भी किया गया।
रोजगार का अवसर भी मिला
उनकी शैक्षणिक योग्यता और परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें एक समाजसेवी संस्था में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य का अवसर उपलब्ध कराया गया है, जहां उन्हें प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही उच्च अध्ययन के लिए सहायता संबंधी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
यह सिर्फ सफलता नहीं, एक सामाजिक संदेश भी है
पूजा साहू की उपलब्धि केवल परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच को चुनौती देती है जिसमें संसाधनों की कमी को सफलता की सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि शिक्षा और अवसर का सही संयोजन मिलने पर कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की संभावनाएं बन सकती हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिले में दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा एवं शोध (पीएचडी) हेतु कितने मामलों में अब तक वास्तविक सहायता दी गई है?
2. पूजा साहू जैसी प्रतिभाओं की पहचान और मार्गदर्शन के लिए क्या प्रशासन के पास कोई संस्थागत मॉडल या छात्र ट्रैकिंग व्यवस्था है?
3. यदि सहायता प्रक्रिया जारी है, तो क्या प्रशासन ने समयसीमा तय की है कि पीएचडी अध्ययन हेतु आर्थिक सहयोग कब तक उपलब्ध कराया जाएगा?