गौरेला-पेंड्रा-मरवाही; 616 अर्जियां, 18 पंचायतें और एक ही शिविर—सेमरदर्री में ‘सरकार का दरवाज़ा गांव तक Aajtak24 News

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही; 616 अर्जियां, 18 पंचायतें और एक ही शिविर—सेमरदर्री में ‘सरकार का दरवाज़ा गांव तक Aajtak24 News

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - जिले के मरवाही जनपद अंतर्गत अंतिम छोर के ग्राम सेमरदर्री में सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखने को मिली। 18 ग्राम पंचायतों के नागरिकों ने यहां पहुंचकर विभिन्न मांगों और शिकायतों से जुड़े कुल 616 आवेदन प्रस्तुत किए। शिविर में विधायक प्रणव कुमार मरपची, कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं की स्थिति और आवेदनों की प्रक्रिया की समीक्षा की।

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य योजनाओं को सीधे धरातल तक पहुंचाना और हर पात्र व्यक्ति को उसका लाभ दिलाना है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी पंचायत का नागरिक किसी भी शिविर में अपनी समस्या रख सकता है, इसके लिए कोई बाध्यता नहीं है। कलेक्टर ने जानकारी दी कि शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण, ड्राइविंग लाइसेंस, ई-केवाईसी जैसी सेवाएं भी मौके पर दी जा रही हैं। साथ ही विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी और तत्काल समाधान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

इस शिविर में राजस्व विभाग द्वारा पट्टा और किसान किताब का वितरण, परिवहन विभाग द्वारा लाइसेंस, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई, अन्नप्राशन और नोनी सुरक्षा योजना जैसी सेवाओं के तहत कई हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। प्रशासन का दावा है कि जिले में कुल 13 शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

🎯 प्रेस वार्ता के लिए 3 तीखे सवाल:

  1. 616 आवेदनों में से कितनों का समाधान मौके पर हुआ और कितनों को लंबित रखा गया है—क्या इसकी सार्वजनिक ट्रैकिंग व्यवस्था है?
  2. अंतिम छोर के गांवों में इतनी बड़ी संख्या में समस्याएं सामने आना क्या यह दर्शाता है कि पहले की योजनाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं?
  3. क्या इन शिविरों के बाद भी फॉलो-अप और शिकायत निवारण की कोई स्थायी मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी, या मामला शिविर तक ही सीमित रहेगा?


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