
झाबुआ; सर्पदंश के बाद वेंटिलेटर पर पहुंचे 6 साल के अरुण को झाबुआ अस्पताल ने दी नई जिंदगी Aajtak24 News
झाबुआ - झाबुआ के जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की तत्परता और टीमवर्क ने एक 6 वर्षीय मासूम की जिंदगी बचाकर मिसाल कायम की है। ग्राम टिकरी बोडिया भूरिया फलिया निवासी अरुण पिता रामलाल भूरिया को 9 मई की शाम जहरीले सांप ने काट लिया था, जिसके बाद उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी। परिजन बिना देर किए बच्चे को सीधे जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी पर तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ संदीप चोपड़ा और मेडिकल टीम ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उपचार शुरू किया।
अस्पताल पहुंचते-पहुंचते जहर का असर तेजी से फैल चुका था और बच्चा सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहा था। चिकित्सकों ने तत्काल उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया और जीवन रक्षक दवाओं के साथ एंटी-स्नेक वेनम का इलाज शुरू किया। इसके बाद बच्चे को PICU (पेडियाट्रिक आईसीयू) में रखा गया, जहां लगातार चार दिनों तक विशेष निगरानी की गई। इस दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ नवीन बामनिया और भावेश परमार सहित पूरी नर्सिंग टीम ने दिन-रात सतर्क रहकर उपचार जारी रखा।
लगातार आठ दिनों के उपचार और निगरानी के बाद अरुण की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा और वह खतरे से बाहर आ गया। 17 मई को उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर घर भेज दिया गया। बच्चे की जान बचने पर परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और चिकित्सकों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह इलाज उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। डॉक्टरों की तत्परता और समर्पण ने एक मासूम की जिंदगी बचा ली।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं लगातार हो रही हैं, क्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध है?
- अगर परिजन समय पर अस्पताल न पहुंचते तो क्या जिला स्तर पर इतनी गंभीर स्थिति संभालने की पूरी तैयारी हर समय मौजूद रहती है?
- क्या ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं, या वास्तव में गांव स्तर पर लोगों को सर्पदंश के तुरंत इलाज के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है?