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| दतिया; 50 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतें बर्दाश्त नहीं: स्वास्थ्य व्यवस्था पर कलेक्टर का सख्त रुख Aajtak24 News |
दतिया - दतिया में स्वास्थ्य विभाग की साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेड़े ने विभागीय कामकाज की गहन समीक्षा की और कई स्तरों पर लापरवाही पाए जाने पर कड़ा रुख अपनाया। बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 50 दिन से अधिक कोई भी शिकायत लंबित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रकरणों का समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण अनिवार्य है, अन्यथा जिम्मेदारी तय की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनमोल पोर्टल और पोषण सेवाओं की समीक्षा में डेटा अपडेट और मॉनिटरिंग में कमी पाए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। साथ ही एंटीनाटल केयर, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और गंभीर एनीमिया मामलों में लक्ष्य से पीछे रहने पर सेवढ़ा और भांडेर के बीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने पीआईसीयू और एनआरसी इकाइयों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने, उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्टाफ की पर्याप्त तैनाती पर जोर दिया।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि शिशु मृत्यु दर और कुपोषण को कम करने के लिए सभी स्वास्थ्य इकाइयों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अंत में कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि स्वास्थ्य योजनाओं का शत-प्रतिशत लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब 50 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों पर भी सख्त निर्देश देने पड़ रहे हैं, तो क्या यह संकेत नहीं है कि सीएम हेल्पलाइन सिस्टम की निगरानी और जवाबदेही स्तर पर गंभीर खामियां हैं?
- एंटीनाटल केयर और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लक्ष्य से पिछड़ने की जिम्मेदारी आखिर तय किस स्तर पर होगी — ब्लॉक, जिला या नीति स्तर पर?
- पीआईसीयू और एनआरसी जैसी जीवनरक्षक इकाइयों की व्यवस्थाओं में कमियां सामने आने के बाद क्या सिर्फ नोटिस और निर्देश पर्याप्त हैं, या फिर वास्तविक फील्ड ऑडिट और जवाबदेही तय की जाएगी?
