ग्वालियर; खाकी का सपना या सियासी शोपीस? 45 दिन में ‘शौर्य’ से नौकरी तक पहुंचाने का दावा Aajtak24 News

ग्वालियर; खाकी का सपना या सियासी शोपीस? 45 दिन में ‘शौर्य’ से नौकरी तक पहुंचाने का दावा Aajtak24 News

ग्वालियर - ग्वालियर में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सुरक्षा बलों में करियर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना” के तहत 45 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। इस योजना के अंतर्गत जिले के 200 युवाओं—जिनमें 80 बालिकाएं और 120 बालक शामिल हैं—को आईपीएस कॉलेज परिसर में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रियंका सिंह घुरैया, कलेक्टर रुचिका चौहान, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया और आईपीएस कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी पी के घोष सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गेश जाटव ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूरी मेहनत और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण लेने की अपील करते हुए कहा कि लक्ष्य तय कर मेहनत करने वाले युवा कभी असफल नहीं होते। कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने हेतु यह विशेष आवासीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि शिविर में युवाओं को शारीरिक दक्षता, लिखित परीक्षा की तैयारी, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रत्येक अभ्यर्थी को 1100 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से देशसेवा का संकल्प लेने और सुरक्षा बलों में शामिल होकर समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग कल्याण प्रीति दीक्षित ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी का 12वीं उत्तीर्ण होना, मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना और पिछड़ा वर्ग का नॉन-क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। साथ ही निर्धारित आयु सीमा और शारीरिक मापदंड भी लागू रहेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। अंत में अतिथियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरित की गई।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. प्रदेश में हर साल हजारों युवा सुरक्षा बलों की भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं, ऐसे में सरकार बताए कि “शौर्य संकल्प” के पिछले बैचों में कितने युवाओं को वास्तविक नौकरी मिली और उसका आधिकारिक डेटा क्या है?
  2. 45 दिन के प्रशिक्षण और मात्र 1100 रुपये मानदेय से क्या वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर पिछड़ा वर्ग के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है, या यह योजना सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
  3. जब प्रदेश में कई जिलों में खेल मैदान, रनिंग ट्रैक और स्थायी फिजिकल ट्रेनिंग संसाधनों की कमी है, तब सरकार युवाओं को सिर्फ अस्थायी शिविरों के भरोसे सुरक्षा बलों की तैयारी कराने की नीति को कितना प्रभावी मानती है?

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