| जनदर्शन में उठे ज़मीन से जुड़े 18 सवाल: क्या इस बार फाइलों से निकलकर मिलेगा लोगों को इंसाफ? Aajtak24 News |
मनेन्द्रगढ़ - जिले में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम एक बार फिर आमजन की समस्याओं का सीधा मंच बना, जहां 18 अलग-अलग मामलों में लोगों ने अपनी परेशानियां प्रशासन के सामने रखीं। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशन में कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की सुनवाई अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार ने की।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए आवेदकों ने भूमि विवाद, अतिक्रमण, नाम सुधार, पट्टा, किरायेदार विवाद और पेड़ कटाई अनुमति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कई मामलों में शिकायतों पर कार्रवाई न होने की बात भी सामने आई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए।
बिछियाटोला के दीपनारायण ने तीन साल से लंबित नाम सुधार का मुद्दा उठाया, जबकि पोंडी के अजमेर सिंह ने पट्टे की जमीन पर हो रहे सड़क निर्माण को रोकने की मांग की। चिरमिरी के आशीष सिंह ने किरायेदार द्वारा कब्जे की शिकायत दर्ज कराई। वहीं अन्य आवेदकों ने भी भूमि विवाद, पोल्ट्री फार्म निर्माण, और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई जैसी समस्याएं रखीं।
अपर कलेक्टर सिदार ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का सूक्ष्म परीक्षण कर तय समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए, ताकि लोगों को भटकना न पड़े। जनदर्शन कार्यक्रम को प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बताया जा रहा है, लेकिन अब नजर इस बात पर है कि दिए गए निर्देश ज़मीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनदर्शन में हर बार समस्याएं सुनी जाती हैं, लेकिन क्या प्रशासन यह डेटा सार्वजनिक करेगा कि पिछले जनदर्शनों के कितने मामलों का वास्तव में समाधान हुआ?
- तीन-तीन साल से लंबित मामलों के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर क्या ठोस कार्रवाई हुई है, या जिम्मेदारी सिर्फ निर्देश देने तक सीमित है?
- भूमि विवाद और अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मामलों में क्या कोई स्वतंत्र निगरानी तंत्र है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके?