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| शहडोल; 100 दिन से धूल खा रही शिकायतें अब नहीं बचेंगी! कलेक्टर ने अफसरों को दिया सख्त संदेश Aajtak24 News |
शहडोल - जिले में लंबे समय से लंबित शिकायतों और धीमी प्रशासनिक प्रतिक्रिया को लेकर अब जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन और समय-सीमा वाले पत्रों की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 100 दिन या उससे अधिक समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निराकरण किया जाए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिन विभागों में लंबे समय से शिकायतें लंबित हैं, वहां संबंधित अधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग करें और निराकरण की जिम्मेदारी लें। उन्होंने साफ किया कि शिकायतों को केवल बंद करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा समाधान हो जिससे शिकायतकर्ता संतुष्ट हो।
सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय अधिकारी नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें और शिकायतों के जवाब एल-1 अधिकारियों के माध्यम से अनिवार्य रूप से दर्ज कराए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी शिकायत अनअटेंडेड नहीं रहनी चाहिए।
बैठक के दौरान विभागों की ग्रेडिंग पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि जो विभाग लगातार सी और डी श्रेणी में बने हुए हैं, वे शिकायतों के निराकरण की गति और गुणवत्ता में सुधार करें और ए श्रेणी में आने का प्रयास करें। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले विभागों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, बिजली, शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग को विशेष रूप से लंबित शिकायतों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिन विभागों में शिकायतों की संख्या कम है, वहां शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में शिवम प्रजापति, सरोधन सिंह, मिनीषा पाण्डेय, अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब शिकायतें 100 दिन से ज्यादा लंबित रहीं, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई और क्या उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी?
- हर समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन सुधारने के निर्देश दिए जाते हैं, फिर भी विभाग लगातार सी और डी श्रेणी में क्यों बने रहते हैं?
- क्या प्रशासन शिकायत बंद होने को सफलता मानता है या शिकायतकर्ता की वास्तविक संतुष्टि का कोई स्वतंत्र मूल्यांकन भी किया जाता है?
