| आम पेड़ पर उल्टा लटकाकर की गई मारपीट का मामला… पिता-पुत्र को 10-10 साल की सश्रम सजा Aajtak24 News |
सूरजपुर - जिले में एक गंभीर आपराधिक मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री डायमंड कुमार गिलहरे की अदालत ने पिता और पुत्र को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला ग्राम पर्री का है, जहां 26 मई 2024 की रात जगरनाथ सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
घटना का विवरण
सूचना के अनुसार, प्रार्थी धीरसाय सिंह ने थाना सूरजपुर को बताया था कि पड़ोस की शांतीबाई ने बताया कि जगरनाथ को उसके पिता रामभरोष सिंह और भाई शिवचरण सिंह द्वारा आम के पेड़ पर उल्टा लटकाकर बुरी तरह पीटा जा रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां दोनों आरोपी डंडा लेकर मौजूद थे और उन्होंने स्वीकार किया कि जगरनाथ उन्हें परेशान करता था, इसलिए उसे पेड़ पर उल्टा लटकाकर मारपीट की गई। 108 एम्बुलेंस की मदद से घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जांच और आरोप
थाना सूरजपुर पुलिस ने मामले में धारा 302, 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की। बाद में साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अदालत का फैसला
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मामला हत्या की श्रेणी में नहीं बल्कि आपराधिक मानव वध (धारा 304, 34 IPC) के अंतर्गत आता है।
अदालत ने आरोपी—
- रामभरोष सिंह (55 वर्ष)
- शिवचरण सिंह (33 वर्ष)
दोनों को 10-10 वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर आरोपियों ने मौके पर ही स्वीकार कर लिया था कि उन्होंने मारपीट की, तो अदालत तक पहुंचने में हत्या (302) से 304 तक मामला बदलने की मुख्य वजह क्या रही?
- क्या पुलिस जांच में ऐसे कोई अहम मेडिकल या फॉरेंसिक साक्ष्य कमजोर पड़े, जिसके कारण अपराध की गंभीर धारा साबित नहीं हो सकी?
- ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की हिंसक ‘सामाजिक सजा’ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की कोई पूर्व-चेतावनी या निगरानी व्यवस्था क्यों प्रभावी नहीं दिखती?