| गढ़ में 'जल जीवन मिशन' का दम फूला: करोड़ों खर्च, फिर भी प्यासी जनता Aajtak24 News |
रीवा/गंगेव - जनपद पंचायत गंगेव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गढ़ इन दिनों भीषण जल संकट की आग में झुलस रही है। पारा 42 डिग्री के पार जा चुका है, लेकिन जनता की प्यास बुझाने वाला सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 40 वर्षों से पानी की सप्लाई सुचारू थी, वहां 'जल जीवन मिशन' के आते ही पानी का अकाल पड़ गया है।
करोड़ों का व्यय, पर प्यासी जनता गढ़ एक बाजारू पंचायत है, जहाँ प्रतिदिन हजारों लोग शासकीय कार्यों और व्यापार के लिए आते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक साल के भीतर पंचायत में करोड़ों रुपए व्यय किए गए। जगह-जगह 50-50 लाख रुपए के पेवर ब्लॉक बिछा दिए गए, लेकिन जब बात बुनियादी सुविधा यानी पानी की आई, तो खजाना खाली बता दिया गया। ग्रामीणों ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद बिजली बिल जमा करने में 'कमीशन' की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए पंचायत ने बिल जमा करना मुनासिब नहीं समझा।
एक महीने से बिजली गुल, 90% आबादी प्यासी जल जीवन मिशन के तहत नई टंकी बनी, पाइपलाइन बिछी और संबंधित ठेकेदारों व जिम्मेदारों की 'सेवा-पूजा' कर काम पंचायत को सुपुर्द कर दिया गया। लेकिन पिछले एक महीने से बिजली बिल जमा न होने के कारण पंप बंद पड़े हैं। गढ़ की 90% जनता पानी के लिए दर-दर भटक रही है। कुछ रसूखदार लोग अवैध रूप से बिजली का कनेक्शन (कटिया) फंसाकर अपना काम चला रहे हैं, लेकिन गरीब जनता और मासूम बच्चे प्यास से तड़प रहे हैं।
गंदगी से पटी टंकी, बीमारी का अंदेशा ग्रामीणों ने एक और गंभीर लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। पानी की टंकी की सफाई महीनों से नहीं हुई है और वह पक्षियों की बीट (गंदगी) से पटी पड़ी है। यदि प्रशासन बिना सफाई किए सप्लाई शुरू करता है, तो यह दूषित पानी पूरे क्षेत्र में महामारी का कारण बन सकता है। विडंबना देखिए कि पंचायत भवन के बाहर बने दो प्याऊ भी केवल 'शो-पीस' बनकर रह गए हैं, उनमें एक बूंद पानी नहीं है।
जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से जनता में आक्रोश जनता ने सीएम हेल्पलाइन (181), कलेक्टर कार्यालय और अपने 'जनता के भगवान' कहे जाने वाले प्रतिनिधियों की चौखट पर कई बार दस्तक दी, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
प्रशासन को अल्टीमेटम क्षेत्र के नागरिकों ने समाचार पत्र के माध्यम से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि इस भीषण गर्मी में यदि तुरंत पानी की व्यवस्था नहीं की गई और भ्रष्टाचार की जांच नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन जनता की इस चीख को सुनकर निराकरण करता है या गढ़ की जनता यूं ही प्यासी तड़पती रहेगी।