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| रीवा-मऊगंज में 'बंद' चेकपोस्टों पर वसूली का 'खुला' खेल; सीएम की घोषणा को ठेंगा दिखा रहे परिवहन माफिया Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद संभालते ही प्रदेश के सभी आरटीओ चेकपोस्टों पर होने वाली अवैध वसूली को रोकने के लिए उन्हें बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। लेकिन रीवा संभाग, जो कभी विंध्य की गरिमामयी राजधानी हुआ करता था, आज भ्रष्टाचार और अघोषित वसूली के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
दावा बंद का, हकीकत वसूली की सरकारी फाइलों में हनुमना (मऊगंज) और चाकघाट (रीवा-प्रयागराज बॉर्डर) के आरटीओ चेकपोस्ट बंद हैं, लेकिन धरातल पर सुहागी पहाड़ और बॉर्डर की सड़कों पर वसूली का सिलसिला निर्बाध जारी है। जनचर्चा है कि इस 'काले खेल' के लिए बाकायदा एक गोपनीय रजिस्टर मेंटेन किया जाता है, जिसमें क्षेत्र के कुछ कथित रसूखदारों, जनप्रतिनिधियों और कुछ स्वयंभू मीडिया संस्थानों की हिस्सेदारी 'सेवा शुल्क' के रूप में दर्ज है।
महीने की फिक्स 'सेवा शुल्क' और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी आरोप है कि संबंधित क्षेत्र के प्रतिनिधियों को लाखों रुपये का मासिक नजराना भेजा जा रहा है। यही कारण है कि जो नेता कभी इन चेकपोस्टों पर धरने देते थे, आज उन्होंने मौन साध लिया है। चर्चा तो यहाँ तक है कि जो जितना बड़ा विरोध का स्वर उठाता है, उसकी 'सेवा शुल्क' का हिस्सा उतना ही बढ़ जाता है। विज्ञापन के नाम पर कुछ समाचार पत्रों और यूट्यूब चैनलों को भी इस भ्रष्टाचार की मलाई खिलाकर शांत रखा जा रहा है।
वाहन चालक की पीड़ा: कौन सुनेगा पुकार? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सुहागी चेकपोस्ट के एक वीडियो में वाहन चालक का दर्द साफ झलकता है। सनातन और मानवता की दुहाई देने वाली सरकार के नाक के नीचे गरीब चालकों को डरा-धमका कर लूटा जा रहा है। ट्रक चालकों का सवाल है कि यदि चेकपोस्ट बंद हैं, तो ये वर्दीधारी और निजी गुंडे सड़क पर अवैध वसूली किसके संरक्षण में कर रहे हैं? अब देखना यह है कि क्या गृह मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय इन 'अघोषित' वसूली केंद्रों पर ताला लगवाते हैं या फिर 'सेवा शुल्क' का यह सिंडिकेट प्रदेश की छवि को ऐसे ही धूमिल करता रहेगा।
