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| भ्रष्टाचारियों पर मेहरबान कौन? जांच में प्रमाणित हुआ भ्रष्टाचार, फिर भी सरपंच-सचिव पर नहीं हुई कोई कार्रवाई Aajtak24 News |
शहडोल/गोहपारू - शहडोल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। गोहपारू जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत लोढ़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां जांच में वित्तीय अनियमितताएँ प्रमाणित होने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बावजूद, उनसे शासकीय राशि की रिकवरी नहीं हुई है। यह स्थिति जिला पंचायत के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और भ्रष्टाचारियों को मिल रही प्रशासनिक ढील को उजागर करती है।
मामले की पूरी कहानी
मामले की शुरुआत कुछ साल पहले हुई, जब ग्राम पंचायत लोढ़ी में निर्माण कार्यों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में घोर अनियमितताओं की शिकायत जिला पंचायत को मिली। शिकायतकर्ताओं ने 15 बिंदुओं का एक विस्तृत पत्र सौंपा, जिसके बाद 12 दिसंबर 2024 को जिला पंचायत ने एक जांच दल का गठन किया। इस टीम ने शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में गहन जांच की। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से यह पाया गया कि तत्कालीन सरपंच प्रभा सिंह और प्रभारी सचिव आशुतोष गौतम ने शासकीय राशि के व्यय में वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय आहरण का मामला सामने आया। जांच में भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बावजूद, जब दोषी सरपंच-सचिव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो शिकायतकर्ताओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने मामले को सीएम हेल्पलाइन में उठाया, जिसका शिकायत क्रमांक 29735574 है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर जांच कर रहे अधिकारियों ने समाधान में यह दर्ज किया कि जांच के उपरांत सरपंच प्रभा सिंह के विरुद्ध धारा 40 और प्रभारी सचिव आशुतोष गौतम के विरुद्ध धारा 92 का प्रकरण मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत शहडोल द्वारा दर्ज किया गया है।
कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जब जांच में भ्रष्टाचार साबित हो गया और दोषियों के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत मामला भी दर्ज हो गया, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आज तक उन पर कोई वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और सबसे महत्वपूर्ण, उनसे शासकीय राशि की रिकवरी क्यों नहीं की गई? सीएम हेल्पलाइन पर कार्रवाई दर्ज होने की जानकारी दी गई, लेकिन वास्तविकता में जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, बीते गुरुवार 28 अगस्त 2025 को ग्राम पंचायत लोढ़ी के ग्रामीणों ने एक बार फिर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत शहडोल को पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में दोषी पाए गए सरपंच और सचिव पर तुरंत कार्रवाई की जाए और जनता के पैसे की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में जब जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सौम्या आनंद से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, "अभी मैं मीटिंग में हूं। बाद में बात करते हैं।" उनका यह संक्षिप्त जवाब इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासनिक स्तर पर इस संवेदनशील मामले को लेकर तत्काल कोई स्पष्टता नहीं है। यह मामला शहडोल जिला पंचायत में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या भ्रष्टाचार को उजागर करने के बाद भी दोषियों को बचाया जा रहा है? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर की गई ढिलाई? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे, लेकिन तब तक ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर से डगमगाता जा रहा है।
