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हरतालिका तीज कल: अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर के लिए रखा जाएगा व्रत, जानें शुभ योग और पूजा विधि Aajtak24 News |
नई दिल्ली - हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह कठोर व्रत किया था। इस साल हरतालिका तीज पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत को और भी ख़ास बनाते हैं।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
हरतालिका तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत अखंड सौभाग्य का वरदान देता है, इसलिए इसे हिंदू धर्म के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है।
इस साल बन रहे हैं कई शुभ योग
इस बार हरतालिका तीज का व्रत कई शुभ योगों के बीच मनाया जाएगा, जिससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
साध्य योग: यह सूर्योदय से लेकर दोपहर 12:09 तक रहेगा।
शुभ योग: दोपहर 12:09 से 27 अगस्त की दोपहर तक।
रवि योग: पूरे दिन रहेगा, जो सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है।
गजकेसरी योग: गुरु और चंद्रमा के एक दूसरे से केंद्र भाव में रहने से यह शुभ योग बन रहा है।
इन शुभ योगों में की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।
हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
व्रत के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 05:56 से 08:31 तक (अवधि: 2 घंटे 35 मिनट)।
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:48 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:31 से 03:23 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:49 से 07:11 तक।
पूजन विधि:
व्रती महिलाएं सुबह स्नान कर तैयार हो जाएं।
शिव-पार्वती के मंदिर जाकर भगवान शिव और नंदी को शहद चढ़ाएं और माता पार्वती को लाल गुलाब, चुनरी और नथ अर्पित करें।
व्रत के दिन 11 नवविवाहिताओं को 16 शृंगार की सुहाग पिटारी भेंट करना शुभ माना जाता है।
5 बुजुर्ग सुहागिनों को साड़ी और बिछिया भेंट करें।
गुड़ के 11 लड्डू माता पार्वती को चढ़ाएं और चावल की खीर का भोग लगाएं।
यह व्रत निर्जला रखा जाता है। रात में जागरण कर भगवान शिव और माता पार्वती का भजन-कीर्तन करना चाहिए।
व्रत का पारण: जानें शुभ समय और विधि
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को शुरू होकर चतुर्थी तिथि पर समाप्त होता है। इस साल व्रत का पारण 27 अगस्त को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। 27 अगस्त को सूर्योदय सुबह 05:57 पर होगा, जिसके बाद व्रत खोला जा सकता है।
पारण विधि और दान:
व्रत का पारण हमेशा मीठी चीज़ें खाकर करना शुभ होता है, जैसे खीर, हलवा, मालपुआ या लड्डू।
व्रत खोलने से पहले सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार का सामान दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा मिलती है।
यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते को मज़बूत बनाता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। इस साल शुभ योगों के कारण इस व्रत का फल और भी अधिक मिलेगा।