अंधविश्वास की पराकाष्ठा: पन्ना जिला अस्पताल में गर्भवती महिला का इलाज तंत्र-मंत्र से, ऑपरेशन थिएटर के सामने झाड़-फूंक का ड्रामा! Aajtak24 News

अंधविश्वास की पराकाष्ठा: पन्ना जिला अस्पताल में गर्भवती महिला का इलाज तंत्र-मंत्र से, ऑपरेशन थिएटर के सामने झाड़-फूंक का ड्रामा! Aajtak24 News

पन्ना/मध्य प्रदेश - जहां एक ओर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं पन्ना जिले के जिला अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने समाज में फैले अंधविश्वास की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया है। पन्ना जिला चिकित्सालय जिसे जीवन बचाने का केंद्र माना जाता है, उसी के ऑपरेशन थिएटर के ठीक सामने एक गर्भवती महिला का इलाज डॉक्टरों के बजाय एक तांत्रिक द्वारा किया जा रहा था। यह सब अस्पताल परिसर के अंदर हुआ और वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मी व अन्य लोग मूकदर्शक बने रहे।जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजन इलाज के लिए पन्ना जिला अस्पताल लेकर आए थे। दर्द से कराह रही महिला को देखकर उसके परिजनों ने डॉक्टरों पर भरोसा करने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लेना उचित समझा और एक तांत्रिक को अस्पताल बुला लिया।

अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के सामने ही तांत्रिक ने अपनी 'तांत्रिक क्रिया' शुरू कर दी। तांत्रिक ने एक नाबालिग बच्ची के हाथों में नारियल पकड़ाया और जोर-जोर से मंत्रों का उच्चारण करने लगा। वह गर्भवती महिला पर अजीबोगरीब क्रियाएं करता रहा। इसके साथ ही, उसने नाबालिग बच्ची को सिर पर पानी की बोतल रखकर गर्भवती महिला के चक्कर काटने को कहा। यह सब कई घंटों तक चलता रहा और अस्पताल में मौजूद महिला के परिजन और अन्य लोग इस 'अंधविश्वास के तमाशे' को देखते रहे। किसी ने भी इस अवैज्ञानिक और खतरनाक गतिविधि को रोकने की कोशिश नहीं की।

इस घटना ने न सिर्फ महिला की जान को खतरे में डाला, बल्कि पन्ना अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह कैसे संभव है कि अस्पताल परिसर के अंदर, जहां डॉक्टर और नर्स मौजूद होते हैं, इस तरह की अवैज्ञानिक गतिविधियां घंटों तक चलती रहें और कोई भी इसे रोकने के लिए आगे न आए? यह दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन का अपनी जिम्मेदारी के प्रति कितना उदासीन रवैया है। इस घटना से यह भी साफ होता है कि आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा अंधविश्वास की गिरफ्त में है, और ऐसे लोग चिकित्सा सुविधाओं पर भरोसा करने के बजाय झाड़-फूंक पर निर्भर रहते हैं। यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और लोगों को शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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