वायरल वीडियो ने खोली हकीकत की पोल
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि एक महिला दर्द से कराहते हुए फर्श पर पड़ी है। वह इतनी बेबस है कि खुद उठ भी नहीं पा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके कुछ ही कदम की दूरी पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी अपनी कुर्सियों पर आराम से बैठे हैं, लेकिन किसी ने भी महिला की मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाया। यह दृश्य दिखाता है कि जनता की सुरक्षा और सेवा की जिम्मेदारी जिन पर है, वही लोग कितने संवेदनहीन हो चुके हैं। यह घटना उन सभी विज्ञापनों और सरकारी दावों की पोल खोलती है, जिनमें महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने की बात कही जाती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उपमुख्यमंत्री, जो हर मंच से 'लाड़ली बहनों' की सुरक्षा का वादा करते हैं, इस घटना पर खामोश क्यों हैं, यह सवाल जनता के मन में आक्रोश पैदा कर रहा है।
सरकार की योजनाओं पर सवालिया निशान
रीवा पुलिस का यह अमानवीय चेहरा न केवल प्रदेश की छवि को खराब करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सरकार की योजनाएं और वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। क्या 'लाड़ली बहन योजना' का उद्देश्य केवल वोट बटोरना है? क्या यह योजना केवल आर्थिक मदद देने तक सीमित है और असली सुरक्षा के मामले में फेल हो चुकी है? यह घटना शासन और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है। जनता की पुकार अब प्रदेश भर में गूंज रही है— "मुख्यमंत्री जी, क्या यही है आपकी सुरक्षा का वादा? क्या यही है बेटियों का सम्मान? आखिर कब तक हमारी 'लाड़ली बहनें' इस तरह बेबस और लाचार हालात में तड़पती रहेंगी?" इस सवाल का जवाब अब सरकार को देना होगा।