नेपानगर कागज़ मिल में करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार की नई दास्तान - प्रदीप चौधरी choudhary Aajtak24 News


नेपानगर कागज़ मिल में करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार की नई दास्तान - प्रदीप चौधरी choudhary Aajtak24 News 

बुरहानपुर - बुरहानपुर की नेपानगर कागज़ मिल में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार, ठेकेदार के बेटे को बनाया चीफ फाइनेंस ऑफीसर , विजिलेंस अधिकारी के बंगले पर 27 लाख रुपए का खर्च , रिक्वायरमेंट में चाचा भतीजाबाद , और अब मिल के पास सैलरी बांटने का भी फंड नहीं , यूनियन कर चुकी है सरकार से केंद्रीय एजेंसियों से घोटाले की जांच करने की मांग दरअसल बुरहानपुर के पास स्थित नेपानगर में एशिया की सबसे पहले कागज़ मिल नेपाल लिमिटेड के रूप में 25 जनवरी 1947 में निजी उद्योग के रूप में स्थापित हुई थी, जिसे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 26 अप्रैल 1956 को देश को समर्पित किया था। कभी इस फैक्ट्री की 88000 टन कागज बनाने की क्षमता हुआ करती थी, और आज यह कंपनी 100 करोड़ से ज्यादा के नुकसान में पहुंचा गई है। इस कंपनी में बैठे अधिकारियों ने इसे करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया आज मिल के हालात ऐसे हैं की जिसमें ज्यादा दामों में वेस्ट मटेरियल को खरीदा जाता है और उसके बाद कम दामों में बने हुए पेपर को बाजार में बेचा जाता है एक ऐसा ही मामला एक अखबार के साथ हुआ जिसमें अखबार में बड़ा ऑर्डर नेपाल लिमिटेड को दिया था लेकिन कम दामों में नेपाली लिमिटेड की कुछ अधिकारियों ने मिली भगत कर कर दूसरे संस्थान को कम दामों में पेपर भेज दिया इसके साथ ही अगर बात की जाए बड़े भ्रष्टाचार की तो उसमें कंपनी के पुराने मशीनों के पार्ट्स जिसमें पीतल तांबा भारी मात्रा में लगा हुआ था उसे बेचने में भी बड़ा भ्रष्टाचार किया है यूनियन ने सभी भ्रष्टाचार के जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच करने की मांग की है लेकिन अब तक किसी भी एजेंसी ने इस घोटाले की जांच नहीं की  करोड़ों रुपए के घोटाले के बाद भी यह कंपनी चल तो रही है लेकिन बड़े नुकसान के बीच इस कंपनी में कभी 7000 से ज्यादा मजदूर काम किया करते थे लेकिन आज की स्थिति में 400 लेबर इस कंपनी में काम कर रहे है जिन्हें सैलरी देने तक का पैसा मिल के पास नहीं है।

ठेकेदार के बेटे को बनाया ,फाइनेंस ऑफिसर रिक्वायरमेंट में हो रहा है चाचा भतीजाबाद

कंपनी में ठेकेदार के बेटे विकास रेड्डी को ही कंपनी में के फाइनेंस ऑफिसर बना दिया गया हालांकि सूत्रों के मुताबिक विकास रेड्डी फाइनेंस ऑफीसर स्केल लायक ही नहीं है लेकिन भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए ठेकेदार के बेटे को ही के फाइनेंस ऑफिसर अप्वॉइंट किया गया जिसके लिए बाकायदा वैकेंसी निकाली गई इसके साथ ही कंपनी में रिक्रूटमेंट के नाम पर चाचा भतीजा बाद हावी है जिसमें अगर जांच की जाए तो कई लोग ऐसे निकलेंगे जो लोग बिना कंपनी जाए ही घर बैठे मोटी तनख्वाह पा रहे हैं मजदूरों को देने के लिए कंपनी के पास पैसा नहीं है लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर तनख्वाह मिल रही है और मजदूरों को पिछले दो महीने से तनख्वाह नहीं मिली है इसके पहले मजदूर को आधी तनख्वाह बांटी गई थी। कंपनी के कुछ लोगों ने खास बातचीत करते हुए बताया कि अगर फाइनेंस डिपार्टमेंट में विकास रेड्डी की फाइलों की अगर जांच करवाई जाए तो बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। कंपनी में बड़ा भ्रष्टाचार किसी भी मीडिया कर्मी को फैक्ट्री के अंदर शूटिंग करने तक की इजाजत नहीं है यहां तक की कंपनी में इतने कड़े नियम बना दिए कि अगर कोई अंदर से वीडियो बनाकर जारी करता है तो उसके ऊपर विभागीय कार्रवाई की जाती है।दरअसल केंद्र सरकार द्वारा कंपनी में विजिलेंस विभाग में विनीत कुमार को बतौर चीफ विजिलेंस ऑफिसर बनाकर भेजा गया है जिनकी प्रतिमाह 2 लाख रुपए सैलरी समय पर उनके खाते में डाली जा रही है इसके साथ ही उनकी आवश्यकता अनुरूप उनके बंगले में वह सभी आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं जिनकी उन्हें आरामदायक नींद लेने के लिए आवश्यकता है बंगले में अब तक 27 लाख रुपए का कंपनी द्वारा खर्च किया जा चुका है इस तरह के फिजूल खर्च कंपनी लगातार कर रही है लेकिन मजदूरों को सैलरी देने के लिए कंपनी के पास फंड की कमी बताई जाती है। स्क्रैप बेचकर अब तक कंपनी को नहीं हुआ मुनाफा लेकिन अधिकारियों की जेब जरूर हुई भारी1947 में शुरू हुई कागज मिल में पुरानी मशीनरी जब काम आना बंद हो गई तो उन मशीनों को स्क्रैप में बेचने का टेंडर भी जारी किया गया लेकिन उसे टेंडर में भी बड़ा घोटाला किया गया है।

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