Jila hospital me badi avyavastha Aaj Tak 24 news

 



Jila hospital me badi avyavastha Aaj Tak 24 news 

शहडोल  - संभाग का चार सौ बिस्तरा जिला अस्पताल सिविल सर्जन की प्रशासनिक अकुशलता के कारण धीरे धीरे अपना महत्व खोता जा रहा है। यहां अपना भार और जिम्मेदारी कम करने के लिए अधिकांश रोगियों को मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है। सबसे अधिक संकट इन दिनों अस्पताल में पानी का है। मरीजों और परिजनों को पीने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है। नल बंद पड़े हैं, बताते हैं कि एक अर्से से यहां की वाटर सप्लाई ठप्प पड़ी है लेकिन सुधार नहीं कराया जा रहा है। यहां डाक्टर और इमरजेंसी स्टाफ को भी बूंद बूंद पानी के लिए सिसकना पड़ रहा है। दवाओं का एक साल से अकाल पड़ा हुआ है, कुछ दिनों पूर्व यहां बुखार की एक सामान्य सी दवा पैरासिटामोल तक नहीं थी जबकि यह दवा उपस्वास्थ्य केन्द्रों में भी मिल जाती है। हड्डी के रोगी अस्पताल में भटकते देखे जाते हैं पर डाक्टर नहीं मिलते जबकि दो डाक्टर पदस्थ हैं। पेयजल व्यवस्था कब सुधरेगी अस्पताल के अंदर कई जगह स्वच्छ व शीतल पेयजल के लिए भले ही नल लगे हुए हैं लेकिन उनमें महीनों से पानी की सप्लाई नहीं हुई है। उनके आसपास कचरा और गंदगी जमा हो रही है। रोगियों और उनके परिजनों को पानी की मुश्किल झेलनी पड़ रही है। परिजन अस्पताल की परिक्रमा लगाकर नेत्र चिकित्सा इकाई के समीप लगे नल में पानी लेने आते हैं। डाक्टर और इमरजेंसी स्टाफ के लिए पानी की व्यवस्था ठप है लेकिन सिविल सर्जन को इससे कोई मतलब नहीं है। जिस संस्था में पानी तक की व्यवस्था नहीं हो वहां अन्य बड़ी व्यवस्थाएं और सुविधाएं क्या हो सकतीं हैं दवाओं का भारी टोटा चार बिस्तरा जिला अस्पताल के लिए औसतन 530 प्रकार की दवाएं अनिवार्यत: मंगानी पड़ती हैं। लेकिन काफी दिनों से यहां 3 सौ प्रकार की दवाएं भी उपलब्ध नहीं है। जो दवाएं उपलब्ध हैं बस उन्ही से काम चलाया जा रहा है। बताया गया कि यहां अस्थमा की आस्थालिन टेबलेट और नेेबोलाइजर आदि की भी कोई सुविधा नहीं है। कई एंटीबायटिक, इंजेक्शन, नेत्र रोग, पेट की बीमारियों आदि की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। यहां दवाओं की समय से डिमांड नहीं भेजी जाती है। सिविल सर्जन किस काम में व्यस्त रहते हैं यह समझ के परे है। मुफ्तखोरी कर रहे हड्डी के डाक्टर जिला अस्पताल में कहने को तो हड्डी रोग के दो दो डाक्टर पदस्थ हैं जिनका वेतन प्रति डाक्टर दो लाख रुपए है। सरकार दोनो डाक्टरों पर चार लाख रुपए महीना फूंक रही है। लेकिन यह दोनो डाक्टर हर्ष श्रीवास्तव और अरविंद अम्बेडकर अस्पताल में कभी दिखाई ही नहीं पड़ते। दोनो अस्पताल आते हैं और जरा देर ठहर कर नदारद हो जाते हैं। सब निजी दुकानदारी मेें व्यस्त रहते हैं यह डाक्टर सब तरफ से केवल पैसा पीट रहे हैं। जबकि हड्डी के इलाज के लिए रोगी अस्पताल आता है और सिर पीट कर लौट जाता है। आपरेशन तो यहां एक साल से भी अधिक समय से नहीं हुए।

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