कवि सम्मेलन साहित्य सृजन का सशक्त हस्ताक्षर है:डॉ योगेश पंडागरे | Kavi sammelan sahity srjan ka sashakt hastakshar hai

कवि सम्मेलन साहित्य सृजन का सशक्त हस्ताक्षर है:डॉ योगेश पंडागरे

पंछीलाल बेले की पुण्य स्मृति में प्रतिभा सम्मान और कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

कवि सम्मेलन साहित्य सृजन का सशक्त हस्ताक्षर है:डॉ योगेश पंडागरे

बैतूल (यशवंत यादव) - आमला कवि सम्मेलन का आयोजन हमारी साहित्यिक धरोहरों को संजोने के साथ साथ हमारी सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रसारित करने का सशक्त माध्यम है।उक्त आशय के विचार डॉ योगेश पंडागरे विधायक आमला ने पंछी लाल बेले की पुण्य स्मृति प्रतिभा गौरव सम्मान और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के गौरवमयी आयोजन में व्यक्त किये।विधायक जी ने कहा कि रामानंद बेले जैसे पुत्र प्रेरणा के पात्र है जिन्होंने अपने पिता जी की पुण्य स्मृति में इस प्रकार का आयोजन रखा।माथनकर लान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ योगेश पंडागरे विधायक आमला उपस्थित थे।वही विशेष अतिथि के तौर पर अनिल कापसे जिला अध्यक्ष अजाक्स बैतूल उपस्थित थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता लाजवंती नागले पूर्व नपा अध्यक्ष आमला ने की।विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ अरुण जयसिंह पुरे चेयरमेन रेडक्रास सोसायटी बैतूल,एस डी वरकड़े विकास खंड शिक्षा अधिकारी आमला,मनीष धोटे बी आर सी आमला,संजय साहू अध्यक्ष ब्यापारी संघ आमला,हेमंत गुगनानी सचिव,अनिल सोनी उपाध्यक्ष,चौकसे ए एस आई आर पी एफ,पत्रकार दिलीप चौकीकर,हरि गोहे,पंकज अग्रवाल,दुर्गा प्रसाद जौंजी,तथा राजेंन्द्र उपाध्याय, महेश देशमुख,पंकज उसरेठे,राहुल धेण्डे, डी के सागरे,मंजू रानी बेले आदि उपस्थित थे।

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   सर्वप्रथम अतिथियों एवं माता जी के हस्ते मां सरस्वती जी की प्रतिमा और पंछीलाल बेले जी के छाया चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुवात हुई।कार्यक्रम में आमला के प्रतिभाओं का सम्मान समारोह का भी आयोजन हुआ इन्हें माननीय विधायक जी के हस्ते सम्मानित किया गया।विकास खंड आमला में कक्षा 10 वी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र रौनिक जैसवाल,कक्षा 12 वी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र मोहित सोलंकी,केंद्रीय विद्यालय आमला में कक्षा 12 वी में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले छात्र साकेत चिल्लाहटे का सम्मान किया गया।वही शिक्षा एवं खेलकूद के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिये गणेश बारस्कर तथा समाज सेवा में उल्लेखनीय कार्य करने वाले समाजसेवी मनोज वाधवा का सम्मान किया गया।श्रेष्ठ कार्यो के लिये जनसेवा कल्याण समिति को सम्मान पत्र प्रदाय कर सम्मानित किया।वही चित्रकला और अभिनय में ख्याति प्राप्त करने वाले युवा कलाकार संजय विश्वकर्मा का भी सम्मान किया गया।इसके साथ ही ब्यापारी संघ आमला के नवनियुक्त पदाधिकारियो ने भी विधायक जी का सम्मान किया।वही विधायक डॉ पंडागरे ने भी नवनियुक्त व्यापारी संघ आमला के पदाधिकारियों का पुष्पमाला पहनाकर अभिनंदन भी किया और शुभकामनाए प्रेषित की।स्वागत एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम का मंच संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया।

  सम्मान समारोह के तुरंत पश्चात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में पधारे कवियों ने काव्य रस के रंग में उपस्थित श्रोताओं को सराबोर किया।कवि सम्मेलन की शुरुवात हरदा से पधारी कवियत्री ज्योति जलज ने मां सरस्वती की आराधना से की ज्योति जलज की कविता "आप क्या मिल गए हर खुशी मिल गयी,मैं अंधेरे में थी रोशनी मिल गयी"पर श्रोता ने खूब आनंद लिया।छिंदवाड़ा से पधारे ग़ज़लकार अजमेरा मयकश की शानदार ग़ज़ल "दर्द मेरा तो फिर से बेअसर हो गया,गर जो उसका करम रम नजर हो गया" ने लोगो को झूमने पर मजबूर कर दिया।भोपाल से पधारे कवि नितेश कुमार नैश ने अपनी श्रृंगार रस की कविता से सब का मन मोह लिया उनकी कविता "संजीदगी से तो हमे हासिल हुआ कुछ भी नही,कुछ रोज जरा खुद को अब मासूम करके देखिये।,कितनी प्यारी तस्वीरे है जिंदगी के एलबम में,फुरसत निकालिये इन्हें भी जूम करके देखिये।"ने श्रोताओं को श्रृंगार रस की रसधार में बहाया।वही चेन्नई से पधारे कवि मनोज मद्रासी की कविता "धन दौलत साथ मे घड़ी दो घड़ी होती है,जिस घर मे माँ बाप होते है वह जगह जन्नत से बड़ी होती है"ने लोगो के मन को अंदर से झकझोर दिया।वही जुन्नारदेव से पधारे कवि रामनाथ यदुवंशी की कविता "क्या क्या होता है क्या नही होता,वो सब का होता है कोई उसका नही होता"पर श्रोताओं ने खूब तांलिया बजा कर सराहा।कार्यक्रम के संयोजक रामानंद बेले राजन की कविता ने माता पिता के आशीर्वाद का बखूबी से चित्रण किया इनकी कविता"मां की ममता का जग में न सानी कोई,पर पिता बिन हमारी क्या पहचान है,मां के आंचल में तो प्यार पाते है सब,परवरिश से पिता की क्या अनजान है" ने लोगो कोभाव विभोर कर दिया।नगर के उदीयमान कवि ग़ज़ल हिंदुस्तानी की शानदार गजल ने लोगो का मन मोहा।कवि सम्मेलन का कुशल मंच संचालन कर रहे प्रख्यात कवि दीपक साहू सरस की कविता "तेरी निगाहों के आमंत्रण की जद में आ गया,सुरक्षा के बावजूद संक्रमण की जद में आ गया।दिल की जमी पर बनाया था प्यार का आशियाना,तेरी बेरुखी से अतिक्रमण की जद में आ गया"। पर श्रोताओं ने खूब वाह वाही की।प्रतीकों के माध्यम से कोरोना संकट को उन्होंने बखूबी से चित्रित किया। 

हास्य कवियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया,हास्य रस की फुहार में सब भीगे।अतिथियों के हस्ते कवियों का भी सम्मान किया गया।अंत मे आभार प्रदर्शन मनोज विश्वकर्मा ने किया।अपने उद्बोधन में रामानंद बेले ने बताया कि आदरणीय बाबूजी पंछीलाल बेले जी की पुण्य स्मृति में प्रतिवर्ष इस प्रकार का आयोजन किया जाता है इस आयोजन के माध्यम से हम आमला किं प्रतिभाओ का सम्मान तो करते ही है वही साहित्यिक गतिविधियों को भी सुचारू रूप देते है।उन्होंने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में अजाक्स के पदाधिकारी सहित सहयोगी देवानंद धुर्वे,रामकिशोर बेले,गुरुवती पंडोले,चंद्रकला बडौदे,शिवदास महोबिया,रंजीत गोहे अकेला आदि का योगदान रहा।

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