सिंगाजी परियोजना की इकाई नंबर चार भी हुई बंद, टरबाइन से आ रही थी आवाजे | Singaji pariyojna ki ikai number char bhi hui band

सिंगाजी परियोजना की इकाई नंबर चार भी हुई बंद, टरबाइन से आ रही थी आवाजे

सिंगाजी परियोजना की इकाई नंबर चार भी हुई बंद, टरबाइन से आ रही थी आवाजे

बीड (सतीश गमरे) - एल एंड टी कंपनी द्वारा निर्माण के समय  उपयोग मे  लाए गए मटेरियल की गुणवत्ता सहित पानी के टेस्ट एक्सपर्ट एजेंसी से  कराए जा रहे है पानी के नाम पर मामले को भटकाने की जा रही हे कोशिश ॥ 

जब इकाइयों का पहले भी करोडो खर्च कर वार्षिक संधारण किया गया था जब यह खराबी की बात को  सामने क्यो नही लाया गया सबसे बड़ा सवाल 

मंजीत सिंह जब से एम डी बने तब से अब तक गांधी सागर एवं सिंगाजी मे बड़ी घटनाए घटित हो चुकी है तकनीकी अनुभव पर सवालिया निशान ॥ 

बीड - संत सिंगाजी पावर परियोजना मे तीन नंबर इकाई की टरबाइन टूटने के बाद अब परियोजना की अंतिम एवं चार नंबर इकाई को भी मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर बंद कर दिया गया है । इकाई के सभी जरूरी टेस्ट किए जा रहे है एक्सपर्ट एजेंसियों के माध्यम से परियोजना मे इस्तेमाल किए जा रहे पानी की जांच सहित निर्माता कंपनी एल एंड टी पावर द्वारा लगाये गए मटेरियल की गुणवत्ता की  जांच भी  की जा रही है विदित होकी जो कार्य घटना के बाद किया जा रहा है यही मटेरियल की गुणवत्ता के टेस्ट निर्माण के समय किया जाना था क्योकि कंपनी की स्टोर नियमावली के पेज नंबर 64 पर स्पष्ट अंकित है की  निर्माण मे लगाये जा रहे मटेरियल का स्टोर मे ही इंस्पेक्शन नोट बनाना जरूरी है ताकि घटिया मटेरियल को निर्माण मे लगाये बगेर ही बाहर रोक दिया जा सके लेकिन यहा निजी स्वार्थ के कारण इंस्पेक्शन नोट ही  नही बनाए गए और मिलीभगत कर गुणवत्ताहीन मटेरियल लगा दिया गया इसे छुपाने के लिए अब पानी की जांच की बात की जा रही है  जिस पानी को शुद्ध कर  बायलर से टरबाइन तक भेजा जाने पर वह भाप बन  जाता है क्या इस भाप की जांच की जाएगी या इंदिरा सागर के बेक वॉटर से लाये जा रहे  पानी की जांच की जाएगी जिसे डी एम प्लांट पर लाकर पहले शुद्ध किया जाकर ही उपयोग मे लाया जाता हे यहा गड़बड़ी है  तो फिर करोडो का डी एम प्लांट किस काम का है तथा पानी मे ही खराबी हे तो अन्य इकाइयो की टरबाइन क्यो नही टूटी वाटर केमेस्ट्री के नाम पर मामले को भटकाने की कोशिश की जा रही है ताकि  बड़े बड़े अधिकारियो को बचाया जा सके गौरतलब हे की इकाई नंबर तीन का पूर्व मे भी करोडो रुपये खर्च कर  वार्षिक संधारण किया गया था अगर टरबाइन मे वाइब्रेशन था तो उस समय नजरंदाज क्यो किया गया और इकाई मे उपकरण लगाकर जल्दबाजी मे  पी जी टेस्ट क्यो किया गया क्या पी जी टेस्ट कर एल एंड टी पावर को मुक्त करने का निर्णय पहले ही मुख्यालय से  लिया जा चुका  था 

मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी मे जब से मंजीत सिंह को कंपनी का एम डी बनाया है तब से अब तक कंपनी के इतिहास मे  दो बड़ी घटना गांधी सागर हायडल प्लांट एवं सिंगाजी पावर थर्मल परियोजना मे हो घटित हो  चुकी है यह घटनाए एम.डी के तकनीकी अनुभव पर सवालिया निशान खड़े कर रही  है टरबाइन टूटने वाली इकाई का निर्माण भी इन्ही की देखरेख मे संपन्न हुआ है अब तो ऊर्जा सचिव क्या करते है देखने योग्य होगा॥ 

वर्जन .......

एक्सपर्ट एजेंसियों के माध्यम से वॉटर टेस्ट सहित एल एंड टी पावर कंपनी द्वारा लगाये गए मटेरियल की गुणवत्ता की जाच कराई जा रही है

वी के कैलासीया 

मुख्य अभियंता 
सिंगाजी पावर परियोजना

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