सेवा का जज्बा हो तो दूरिया मायने नहीं रखती | Seva ka jazba hoto duriya mayne nhi rakhti

सेवा का जज्बा हो तो दूरिया मायने नहीं रखती

कोरोना कर्मवीर कासिम अली ने साढे तीन हजार किमी दूर से भेजी मदद

सेवा का जज्बा हो तो दूरिया मायने नहीं रखती

अलीराजपुर (रफीक क़ुरैशी) - सेवा का जज्बा हो तो दूरिया मायने नहीं रखती। ओर सेवा भी करीब साढे तीन हजार किमी दूर से तो सुनकर आष्चर्य होता है लेकिन यह सच है। अलीराजपुर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर ग्राम आम्बुआ निवासी कासिम अली इस्माइल अली जोबटवाला जो कि करीब 12 वर्षों से कुवैत में नौकरी करते है। उनकी माताजी, पत्नी और दो बच्चे आम्बुआ में ही रहते है। कहते है कि अपनी संकट के समय जरूरतमंदों की मदद खुदा की सबसे बडी इबादत होती है। इसी जजबे के साथ ऐसा ही कुछ कासिम भाई ने किया है, उन्होंने हजारों मिल दूर होने के बावजूद कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉक डाउन के कारण जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की मिसाल कायम की है। कासीम भाई ने कुवैत में रहते हुए भी अपने देष अपनी मातृभूमि के रहवासी जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ आगे बढाया है। कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन और इसमें आम्बुआ के गरीब जरूरमंदों की मदद चिंता करते हुए उन्होंने कुवैत से राषि भेजकर एक दिन का भोजन कराने का पुण्य प्राप्त किया है। लॉक डाउन के मद्देनजर पिछले 21 दिनों से जरूरमंदों, असहाय लोगों को भोजन प्रदान करने वाले आम्बुओं के युवाओं को उन्होंने यह मदद पहुंचाई है। कुवैत में रह रहे कासीम भाई ने बताया देष पर संकट के दौरान जरूरतमंदों की सेवा करने का ऐसा मौका जीवन में कभी-कभी मिलता है। 

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