कोरोना के खिलाफ ऐलाने-जंग, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में अनाज वितरण की मुहीम का चौथा दिन
अनाज वितरण के लिए लगातार दूसरे दिन नांव से पहूंची जयदीप पटेल की टीम ग्राम कष्टा और घणवी
धार - कहते है कि एक युवा का दृढ़ संकल्प, पत्थरों में सुराख करने में कारगर साबित होता है, ऐसा ही कुछ नजर आया, विकासखण्ड डही के ग्राम दसाणा, कष्टा और घणवी (धरमराय) में। जहां लगातार दूसरे दिन जयदीप पटेल की टीम नांव से अनाज सामग्री लेकर पहूंची और यहां निवासरत् विकासखण्ड डही की सबसे गरीब और पिछड़ी हुए नायक जाति को राशन सामग्री का वितरण किया गया। जनपद पंचायत डही के प्रधान जयदीप पटेल की टीम के द्वारा अनाज वितरण की इस मुहीम का आज शनिवार को चौथा दिन था, लेकिन नांव से सामग्री का परिवहन कर इन गरीबों तक पहूंचाने के लिए यह लगातार दूसरा दिन है, विकासखण्ड डही के यह ऐसे क्षेत्र है जहां पहाड़ी इलाका होने से संसाधनों की एप्रोच बिल्कुल नही के बराबर होती है, यहां निवासरत् नायक जाति के लोग नांवों से नर्मदा नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर पहूंचकर अपने परिवार के पालन पोषण के लिए मजदूरी आदि करते है। ऐसे में इस लॉकडाउन के दौरान बन्द पड़ी इन लोगों की मजदूरी के समय में पटेल की टीम के द्वारा इन्हें पहूंचाया जा रहा राशन एक तरीके से इनके लिए इस कठीन समय में जीवनदान साबित हो रहा है, इससे पूरे क्षेत्र में जयदीप पटेल और उनकी टीम की जमकर सराहना भी की जा रही है।
चौथे दिन भी लगातार पटेल के साथ भाजपा मंडल अध्यक्ष मुकेश बघेल, पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष भार्गव, नगर परिषद डही के अध्यक्ष कैलाश कन्नौज, भाजयुमो अध्यक्ष सबलसिंह अलावा, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष शाहरुख बलोच, युवा नेता सौरभ भावसार, कपिल भावसार आदि के साथ ही बड़ी संख्या मे भाजपा कार्यकर्ता रहे।
कौन है नायक जाति
यह जाति विकासखण्ड डही की वह जाति है जिसे सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग में मानती है। जबकि ये जाति यहां पर पहाड़ों में बनी अपनी झोपड़ियों में निवास करती है तथा जंगल से जलाउ लकड़ी काटकर लकड़ी और कोयला शहर में अपने सिर पर ढोकर लाती है और यहां लाकर इसे बेचती है, जिससे मिलने वाली राषि से यह लोग अपने परिवार के लिए भोजन सामग्री जुटाते है और अपने परिवार का पालन पोषण करते है। अन्य पिछड़ा वर्ग में मान्य होने से इस जाति के लोगों को सरकार द्वारा अजा और अजजा वर्ग के लिए दी जाने वाली अनेक सुविधाएं नही मिल पाती हैं, यह प्रमुख कारण है कि इन लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़ेपन का।
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