अतिथि शिक्षकों को नहीं मिला मानदेय, होरही अवहेलना
अतिथि शिक्षकों की दिवाली मनेगी अंधेरे में
थांदला (कादर शेख) - एक और शासन शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू कर रहा है कि आदिवासी बहुल जिले में शिक्षा से वंचित कोई भी नहीं रहे उसी के चलते कई ऐसे स्कूल हैं जहां पर आज भी शिक्षकों की कमी है शासन ने कई जगह ऐसे हाईस्कूल व हायरसेकेंडरी स्कूल बना दिए जहां पर छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है मगर मात्र 2 से 3 शिक्षक पूरी हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी को संभाल रहे हैं उस आधार पर देखा जाए तो सिर्फ अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल है चल रही है गौरतलब है कि अतिथि शिक्षक हमेशा निस्वार्थ भाव से परमानेंट शिक्षक से भी अधिक सेवाएं देते हैं, कई ऐसे अतिथि शिक्षक हैं जो 1 जुलाई से ही अपनी सेवाएं देने के लिए जहां वे गत वर्ष पढ़ा रहे थे वहां पर पढ़ाना आरंभ कर दिया था, मगर ऑनलाइन सेट अप के चलते एवं विषयवार अतिथि शिक्षकों की भर्ती की वजह से कई अतिथि शिक्षकों को बाहर होना पड़ा जैसे ही नया सत्र आरंभ हुआ यह सत्र अतिथि शिक्षकों केलिए बड़ा ही पेचीदा रहा इस प्रकार की जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया एवं विषयवार अतिथि शिक्षकों को जो 10 से 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं उन्हें भी अनुभव का मौका न देते हुए मात्र गत वर्ष जिन्होंने अतिथि शिक्षकों ने कार्य किया उन्हें सिर्फ 25 अंक देकर उनका चयन किया गया अगर किसी अतिथि ने पिछले वर्ष नहीं पढ़ाया तो वह स्वत: बाहर हो गया ज्ञात रहे कि अतिथि शिक्षक के भरोसे कई स्कूले आज भी चल रही है जहां पर शिक्षकों की कमी है बच्चों की तादाद दिन पर दिन बढ़ रही है मगर सिर्फ 4 से 5 शिक्षक हायर सेकेंडरी हाई स्कूल को संभाल रहे हैं किस प्रकार से अतिथि शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है
माह मार्च-अप्रैल का अभी तक नहीं मिला वेतन
अतिथि शिक्षक किस प्रकार से अपनी सेवाएं दे रहे हैं मगर उनके साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है जो एक परमानेंट कर्मचारी सेवा नहीं देता ऐसी सेवाएं अतिथि शिक्षक देने के बावजूद भी उनका वेतन समय पर नहीं निकाला जाता है नया सत्र आरंभ हो गया मगर मार्च-अप्रैल का वेतन अभी तक जमा नहीं हुआ
अंधेरे मनेगी दीवाली
दीवाली सर पर है मगर नहीं हुआ वेतन जमा अपने परिवार के साथ अंधेरे में दीवाली मने गी आज तक नये सत्र का भी मानदेय नहीं मिला लगता है शासन भी यही चाहती है कि अतिथि शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जाना कहा तक उचित है क्या उनके बचो के दीवाली की खरीदी नहीं करना क्या शासन इस और पहल करेगा या अंधेरे में मनाएगे दीवाली,,
कई बार अतिथि शिक्षकों ने संकुल प्राचार्य से इस बारे में बात की तो उन्होंने सिर्फ यही जवाब दिया कि अलॉटमेंट नहीं जब अलॉटमेंट आएगा तब वेतन जमा होगा शासन को ऐसा करना चाहिए कि किसी भी मद से अतिथि शिक्षकों का वेतन कर देना चाहिए, अतिथि शिक्षक कैसे अपने परिवार को पालता है वह स्वयं जानता है एक और अपने बच्चे को स्कूल में एडमिशन, काफी किताबें, ड्रेस फिश का बोझ उसके सिर पर रहता है मजबूरन उसे अपने बच्चों के भविष्य के लिए ब्याज से पैसे लेकर अपना दिन गुजारा करता है ऐसे में चाहिए कि अतिथि शिक्षकों का वेतन समय पर जमा होना चाहिए
नहीं होते अतिथियों के वेतन बिल, जनरेट
ज्ञात रहे कि कई वर्षों से अतिथि शिक्षक अपने चयन के आधार पर स्कूलों में सेवाएं देते हैं शाला के समयानुसार एवं परेड के अनुसार जो इन्हें मानदेय समय पर मिलना चाहिए वह भी नहीं दिया जाता है, कई ऐसे अतिथि शिक्षक हैं जिनके वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद भी उनके वेतन बिल जनरेट नहीं किए जाते हैं, जिससे उनकी एनआईसी वेतन स्लिप नहीं निकल पाती है, यह सिर्फ थांदला ही नहीं अपितु पूरे जिलेभर में भी हो रहा है, स्थानीय अधिकारी सिर्फ अपने चहेते लोगों का बिल जनरेट कर देते हैं, जैसे अलॉटमेंट कम होने की वजह से पक्षपात करते हुए बीईओ द्वारा कन्या संकुल के अतिथि शिक्षकों का भुगतान पहले किया गया एवं शेष संकुल के अतिथि शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, कई बार तो अतिथि शिक्षकों को ऐसे विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जैसे संकुल प्राचार्य द्वारा उपस्थिति बनाकर बीईओ कार्यालय में दी जाने पर बीईओ कार्यालय में अकाउंट का काम करने वाले लोगों द्वारा दिनों की गिनती की जाती है व अतिथि शिक्षकों को नसीहत दी जाती है कि इतना मानदेय कैसे हुआ अर्थात रेवाड़ी का प्रसाद उन्हें नहीं मिल पाने से अतिथि शिक्षकों का मानदेय भुगतान में विलंब पहुंचाना व बेवजह फाइल को अटकाना उनका मुख्य उद्देश्य रहता है, अब देखते हैं अन्य अधिकारी कर्मचारियों को दीपावली के पूर्व वेतन दिए जाने का आदेश शासन ने जारी कर दिया है, क्या शासन के निर्देशानुसार अतिथि शिक्षकों का मानदेय भुगतान किया जाएगा या फिर उनकी दिवाली कोरी ही मनेगी l
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