गणपति बब्बा से सज गए बाजार | Ganpati babba se saj gaye bajar

गणपति बब्बा से सज गए बाजार

गणपति बब्बा से सज गए बाजार

झाबुआ (अली असगर बोहरा) - गणेषोत्सव पर्व नजदीक आते ही शहर के बाजारों में गणेष मूर्तियों की दुकाने जगह-जगह सज गई है। शहर में करीब 12-15 दुकाने मूर्तियों की लगी हुई है। जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस के साथ मिट्टी से बने गणेषजी की मूर्तियां बिक रहीं है। प्लास्टर ऑफ पेरिस पर इस बार नेषनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) के निर्देष पर बेन किया हुआ है, बावजूद इसके प्रतिवर्ष इनकी मांग अधिक होने से ये मूर्तियां बाजारों में अधिक बिकती है। इस बार भी यदि दुकानों पर अब तक गणेष मूर्तियों की बुकींग पर नजर डाली जाए, तो पीओपी की मूर्तियां अधिकांष बुक हुई है।

गणपति बब्बा से सज गए बाजार

गणेषोत्सव पर्व 2 सितंबर को है। इस दिन सुबह से ही गणपति बाप्पा मोरिया …. चार लड्डू चोरिया …., के जयघोष के साथ घर-घर, दुकान-दुकान एवं विभिन्न मंडलों एवं समितियों द्वारा गणेष प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। बैंड-बाजों और ढोल-धमाकों के साथ चल समारोह एवं जुलूस निकाले जाएंगे। इसके साथ ही 10 दिनों तक संपूर्ण जिले में गणेषोत्सव पर्व की धूम मची रहेगी। विभिन्न कार्यक्रम होंगे। झाबुआ की सबसे बड़ी गणेषजी की प्रतिमा झाबुआ का राजा की प्रतिवर्ष की तरह इस तरह इस वर्ष भी शहर के कस्तूरबा मार्ग में जेकेआर द्वारा स्थापना होगी। यहां प्रतिदिन सुबह के साथ रात में महाआरती एवं महाप्रसादी का भव्य आयोजन होगा। इसके अलावा मुख्य रूप से राजवाड़ा चौक पर सार्वजनिक गणेष मंडल द्वारा गणेष प्रतिमा की स्थापना कर कवि सम्मेलन, प्रष्न मंच, अंताक्षरी प्रतियोगिता जैसे कई बड़े आयोजन किए जाएंगे। शहर में करीब 3 दर्जन से अधिक स्थानों पर गणेष मूर्तियों की स्थापना कर प्रतिदिन आरती-प्रसादी के साथ विभिन्न प्रतिगिताओं का आयोजन होगा।

पीओपी की बिक रहीं प्रतिमाएं

झाबुआ के बाजार में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमाएं भी अधिकांष बिक रहीं है। प्रायः लोगों द्वारा इन प्रतिमाओ की ही खरीदी अधिक की जाती है, क्योकि यह प्रतिमाएं चलन में आने से लोग इनकी अधिक खरीदी करते है, हॉलाकि कई संस्थाओं द्वारा मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने का अब प्रषिक्षण दिया जाने लगा है, लेकिन आज भी वृहद स्तर पर विभिन्न मंडलों एवं समितियों द्वारा जिन प्रतिमाओं की स्थापन की जाती है, वह पीओपी की ही होती है। वर्तमान में भी बाजारों में सजी गणेष मंडलों की दुकानों पर जहां पीओपी की प्रतिमाएं अधिक सजी हुई है वहीं इन दुकानों पर बुकींग भी इन मूर्तियों की ही अधिक है, अब देखना यह है कि एनजीटी के निर्देषों के बाद जिला प्रषासन इन मूर्तियों के विक्रय पर इस वर्ष कितना प्रतिबंध लगा पाता है।

50 रू. से लेकर 12 हजार रू. तक की मूतियां

प्रतिवर्ष जिला चिकित्सालय मार्ग पर मूर्तियांं का व्यवसाय करने वाले युवा कैलाष राठौर ने बताया कि उनकी दुकान पर 50 से लेकर 12 हजार रू. की मूर्तियां उपलब्ध है। वे इंदौर से रेडिमेड मूर्तियां खरीदकर लाते है एवं उनका श्रृंगार अपनी दुकान पर कलाकारों से करवाते है। वे पिछले 10-12 वर्षों से यह व्यवसाय कर रहे है। विषेष प्रतिमाओं में इस बार घंटी वाले गणेषजी, कृष्ण अवतार में गणेषजी, बाल गणेषजी, दगड़ू गणेषजी, मोरपंख पर बैठे गणेषजी, लड्डू हाथ में लिए गणेषजी, हाथी पर सवार विघ्नहर्ता, महाराष्ट्र के देवता माऊली गणेषजी, ब्राम्हण गणेषजी आदि है। श्री राठौर ने बताया कि इस बार पीओपी की मूर्तियों पर बेन होने के कारण उनके द्वारा लोगों के लिए मिट्टी से बनी गणेषजी की मूर्तियां भी लाई गई है, लेकिन उनके अनुसार लोगों द्वारा जो अब तक बुकींग करवाई गई है वह अधिकांष पीओपी की मूर्तियों ही करवाई है, क्योकि यह मूर्तियां चलन में होने के साथ बड़े गणेष मंडलों एवं समितियों द्वारा इन्हीं प्रतिमाओं की स्थापना अधिक की जाती हे।

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