चिरहुला नाथ मंदिर मार्ग पर कथित अवैध निर्माण का मामला गरमाया, महापौर ने दिए जांच के निर्देश

चिरहुला नाथ मंदिर मार्ग पर कथित अवैध निर्माण का मामला गरमाया, महापौर ने दिए जांच के निर्देश

रीवा। शहर के प्रसिद्ध चिरहुला नाथ मंदिर मार्ग पर शासकीय भूमि में कथित अनधिकृत निर्माण का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 43 में पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर अधिवक्ता बी.के. माला ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बिना आवश्यक अनुमति बाउंड्री निर्माण, शासकीय भूमि पर कथित कब्जे और मंदिर मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

मामले में नगर निगम रीवा के महापौर ने 6 अक्टूबर 2026 को आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण करने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे संबंधित निर्माण कार्य और भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच की संभावना बढ़ गई है।

बाउंड्री निर्माण और भूमि की सीमा पर सवाल

शिकायत के अनुसार, चिरहुला नाथ मंदिर तपोभूमि सिद्ध आश्रम से लगी शासकीय भूमि पर पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य कराया जा रहा है। शिकायत में निर्माण एजेंसी डीजीएनकेए प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यों पर सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि स्थल के उत्तर और पूर्व दिशा में आवश्यक सीमांकन एवं अनुमति के बिना पक्की बाउंड्री का निर्माण कराया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित स्थल का निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण स्वीकृत सीमा के भीतर है या शासकीय भूमि के किसी हिस्से पर अनधिकृत निर्माण हुआ है।

मंदिर मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कथित निर्माण के कारण मंदिर मार्ग पर आम नागरिकों और श्रद्धालुओं के आवागमन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सार्वजनिक रास्ते की वास्तविक चौड़ाई, भूमि की सीमा और निर्माण के लिए जारी अनुमतियों की जांच आवश्यक बताई गई है।

अनुबंध की शर्तों की जांच की मांग

मामले में शासकीय भूमि से संबंधित अनुबंध क्रमांक 05/पी.आई.यू./2024-25 की शर्तों की जांच की मांग भी की गई है। संबंधित भूमि का सीमांकन, निर्माण की स्वीकृति, एजेंसी को दिए गए अधिकार और मौके पर चल रहे कार्यों का स्वीकृत दस्तावेजों से मिलान जांच के प्रमुख बिंदु हो सकते हैं।

महापौर के पत्र के बाद कार्रवाई पर नजर

महापौर द्वारा नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखे जाने के बाद अब संबंधित विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायत के आधार पर स्थल निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों की जांच और निर्माण एजेंसी से दस्तावेज प्राप्त करने जैसे कदमों से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, शासकीय भूमि पर कब्जे और अनधिकृत निर्माण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जांच में यदि नियमों या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित निर्माण एजेंसी और विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।

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