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| बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं तक पोषण आहार पहुंचने की स्थिति का हो सत्यापन; रिकॉर्ड, भुगतान और वास्तविक वितरण की निष्पक्ष जांच की उठी मांग |
शिकायतों में आशंका जताई जा रही है कि लाभार्थियों के नाम पर दर्ज भोजन और पोषण सामग्री का पूरा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसका सत्यापन किया जाना चाहिए। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
उपस्थिति और वितरण रिकॉर्ड का हो मिलान
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों की उपस्थिति, भोजन वितरण और पोषण सामग्री की उपलब्धता की जांच आवश्यक बताई जा रही है। इसके साथ ही गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और किशोरियों के लिए निर्धारित पोषण सामग्री के वितरण का भी सत्यापन किया जाना चाहिए।
जांच के दौरान केंद्रों के उपस्थिति रजिस्टर, लाभार्थियों की वास्तविक संख्या, खाद्य सामग्री की आपूर्ति, वितरण रिकॉर्ड और संबंधित भुगतान का आपस में मिलान किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दर्ज आंकड़ों और जमीनी स्थिति में कोई अंतर तो नहीं है।
कुपोषण उन्मूलन योजना के लाभ पर सवाल
कुपोषण दूर करना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में योजनाओं पर खर्च होने वाली राशि और उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचना जरूरी है।
यदि किसी केंद्र में उपस्थिति, खाद्य सामग्री वितरण या भुगतान संबंधी अनियमितता सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, बिना जांच के किसी व्यक्ति या समूह को दोषी ठहराने के बजाय अभिलेखों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाना आवश्यक है।
जिम्मेदारी तय हो, तभी व्यवस्था में आएगा सुधार
रीवा-मऊगंज के आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण, लाभार्थियों से प्रत्यक्ष जानकारी और वितरण प्रक्रिया का भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र जांच कराकर सामने आने वाली अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, पोषण आहार वितरण, समूह संचालकों के भुगतान और अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच कब कराएगा। पारदर्शी जांच से न केवल शिकायतों की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि पोषण योजनाओं का लाभ बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक सही तरीके से पहुंचे।
