सरकारी शराब दुकानों के आसपास कथित अवैध हाते, राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल

सरकारी शराब दुकानों के आसपास कथित अवैध हाते, राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल

रीवा। रीवा और नवीन मऊगंज जिले में सरकारी शराब दुकानों के आसपास कथित रूप से अवैध दारू के हाते संचालित होने की शिकायतों ने आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकृत शराब दुकानों के आसपास पीने-पिलाने की अनधिकृत व्यवस्था होने से दिनभर लोगों का जमघट लगा रहता है। इससे ग्रामीणों, राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, शराब के नशे में गाली-गलौज, विवाद और मारपीट जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कुछ लोगों ने राह चलते नागरिकों के साथ अभद्रता किए जाने की बात भी कही है। हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित स्थानों की जांच होना आवश्यक है। प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

शिकायत करने वालों को ही सवालों का सामना?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब के नशे में होने वाले विवादों की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचने पर कई बार शिकायतकर्ताओं को ही सवालों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों के अनुसार, उनसे रात में बाहर निकलने को लेकर भी सवाल किए जाते हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित शिकायतों और पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।

सवाल यह है कि यदि किसी राहगीर के साथ गाली-गलौज, मारपीट या लूटपाट जैसी घटना होती है, तो उसकी शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? रात के समय आवागमन करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। शिकायतकर्ता को दोषी ठहराने के बजाय घटना की परिस्थितियों की जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

3,200 अवैध दुकानों का दावा, आधिकारिक पुष्टि जरूरी

रीवा और मऊगंज में अवैध शराब कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर लगभग 3,200 अवैध दुकानों और बिक्री केंद्रों के संचालन का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आबकारी विभाग को वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए यह बताना चाहिए कि दोनों जिलों में अवैध शराब बिक्री के कितने मामले सामने आए, कितनी कार्रवाई हुई और कितने प्रकरण अभी लंबित हैं।

सरकारी शराब दुकानों के आसपास कथित अवैध हाते संचालित होने की शिकायतों की भी अलग से जांच जरूरी है। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित स्थानों पर पीने-पिलाने की व्यवस्था के लिए वैध अनुमति है या नहीं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या कार्रवाई की गई है। शराब की गुणवत्ता और बिक्री संबंधी नियमों के पालन की नियमित जांच भी आवश्यक है।

आबकारी विभाग और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही

इस पूरे मामले में आबकारी विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। साथ ही, ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सरपंचों, विधायकों और सांसदों की जिम्मेदारी भी बनती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

प्रशासन को यह बताना चाहिए कि कथित अवैध हातों की पहचान के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया है या नहीं। यदि अनधिकृत रूप से शराब पिलाने की व्यवस्था संचालित मिलती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, विवाद और मारपीट की शिकायतों पर पुलिस को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

आश्वासन नहीं, कार्रवाई की दरकार

किसी भी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था का आकलन केवल अपराध दर्ज होने या कार्रवाई के आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और भरोसे से भी होता है। ग्रामीणों को अपने गांव, बाजार और सड़कों पर सुरक्षित महसूस होना चाहिए। शराब दुकानों के आसपास यदि अनधिकृत गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो उनकी जांच कर उन्हें रोकना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

अब सवाल यह है कि रीवा और मऊगंज में सरकारी शराब दुकानों के आसपास कथित अवैध हाते की जांच कब होगी? क्या आबकारी विभाग और पुलिस संयुक्त निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करेंगे? ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएंगे और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

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