मऊगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: सिविल अस्पताल में डॉक्टर नदारद, हनुमना अस्पताल के वार्ड में घूमते मिले आवारा कुत्ते

मऊगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: सिविल अस्पताल में डॉक्टर नदारद, हनुमना अस्पताल के वार्ड में घूमते मिले आवारा कुत्ते 

मऊगंज। जिला बनने के करीब तीन वर्ष बाद भी मऊगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जिला मुख्यालय के सिविल अस्पताल और हनुमना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर सिविल अस्पताल में ओपीडी के दौरान डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और इमरजेंसी वार्ड में ताला होने के आरोप सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर हनुमना अस्पताल के वार्ड और परिसर में आवारा कुत्तों के घूमने का वीडियो सामने आया है।

518 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी, फिर भी डॉक्टरों का इंतजार

मऊगंज सिविल अस्पताल में एक दिन में 518 से अधिक मरीजों के ओपीडी में पहुंचने की जानकारी सामने आई। मरीजों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद शाम की ओपीडी के दौरान कई चिकित्सक अपनी निर्धारित जगह पर मौजूद नहीं मिले। मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा।

स्थानीय निवासी विजय द्विवेदी का आरोप है कि वह अपनी मां और बहन को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी उन्हें दवा उपलब्ध कराने वाला जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिला। वहीं इमरजेंसी वार्ड के दरवाजे पर ताला लगे होने का दावा भी किया गया है।

फार्मासिस्ट की जगह दूसरे व्यक्ति से दवा देने का आरोप

अस्पताल में फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मरीजों को दवा दिए जाने की बात भी सामने आई है। यदि यह आरोप सही है तो यह दवा वितरण व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

बीएमओ बोले- नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे हालात

मामले में बीएमओ डॉ. एसडी कोल ने बताया कि ओपीडी का समय सुबह 9 से दोपहर 2 बजे और शाम 5 से 6 बजे तक निर्धारित है। उनका कहना है कि दूसरी शिफ्ट में उनके अलावा अन्य डॉक्टर उपस्थित नहीं होते, जिसके कारण उन्हें अकेले मरीजों को देखना पड़ता है।

बीएमओ के अनुसार कुछ डॉक्टर सुबह करीब 10:30 बजे अस्पताल पहुंचते हैं और दोपहर करीब 12 बजे चले जाते हैं। इस संबंध में संबंधित चिकित्सकों को नोटिस भी जारी किए गए हैं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। बीएमओ ने इसे अस्पताल की व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति बताया।

हनुमना अस्पताल के वार्ड में कुत्ते, वीडियो से उठे सवाल

इधर हनुमना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल परिसर और वार्डों में आवारा कुत्ते घूमते नजर आ रहे हैं। इससे अस्पताल की साफ-सफाई, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शाम और रात के समय अस्पताल पहुंचने पर मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा के साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है।

हनुमना बीएमओ डॉ. नागेंद्र मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में निगरानी की जाती है। कुत्ते अस्पताल के अंदर कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया है।

जिला बनने के बाद भी बुनियादी सवाल कायम

मऊगंज को जिला बने लगभग तीन साल हो चुके हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय के अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवा वितरण और इमरजेंसी सेवाओं को लेकर सवाल उठना गंभीर विषय है। वहीं अस्पताल के वार्डों में आवारा जानवरों का पहुंचना साफ-सफाई और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर नोटिस जारी होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा और अस्पताल के भीतर आवारा कुत्ते पहुंच रहे हैं, तो जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?



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