रीवा कलेक्टर तक शिकायत के बाद भी नहीं बदले हालात! हजारों की आबादी पर जलभराव का संकट, गढ़ तिराहे पर करंट का खतरा

रीवा कलेक्टर तक शिकायत के बाद भी नहीं बदले हालात!  हजारों की आबादी पर जलभराव का संकट, गढ़ तिराहे पर करंट का खतरा

गढ़/रीवा - रीवा–गढ़ नईगढ़ी मार्ग स्थित गढ़ बस्ती तिराहा और आसपास का इलाका लगातार बारिश के चलते गंभीर जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। बीते करीब 24 घंटे से हो रही बारिश के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। कई स्थानों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है, जबकि जलभराव वाले स्थान के समीप ही बिजली का ट्रांसफार्मर और विद्युत तार मौजूद हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों में करंट फैलने और बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या का मूल कारण पानी की उचित निकासी नहीं होना है। बारिश का पानी नालियों के जरिए आगे निकलने के बजाय बस्ती और मकानों के आसपास जमा हो जाता है। स्थिति लगातार गंभीर होने के बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी अब तक समस्या का स्थायी समाधान करने में सफल नहीं हुए हैं।

17 अगस्त को खबर, 18 अगस्त को हालात और गंभीर

गढ़ तिराहे की समस्या को लेकर 17 अगस्त 2026 को  दैनिक आजतक 24 समाचार ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर प्रशासन और जिम्मेदार विभागों का ध्यान आकर्षित किया था। खबर में जलभराव, ट्रांसफार्मर के पास मौजूद खतरे और नाली की खराब व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया था। लेकिन इसके अगले ही दिन, 18 अगस्त को लगातार बारिश के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। इसके बावजूद मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों के पहुंचने और तत्काल राहत अथवा जल निकासी की व्यवस्था किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की गई तो लगातार बारिश की स्थिति में नुकसान और बढ़ सकता है।

करीब  हजारों  की आबादी के सामने बड़ा सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में करीब हजारों  की आबादी रहती है। छोटी-छोटी घनी बस्तियां होने के कारण लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में जलभराव और बिजली के ट्रांसफार्मर की मौजूदगी को केवल एक स्थानीय समस्या मानकर नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? यदि इतनी बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में बारिश का पानी लगातार घरों में घुस रहा है और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं है, तो जिम्मेदार विभागों को इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

25 वर्षों से नालियों पर खर्च, फिर भी पानी की निकासी नहीं?

स्थानीय लोगों ने नाली निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 25 वर्षों से बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नाली निर्माण एवं जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद आज तक बारिश के पानी की स्थायी निकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि शासन से प्राप्त नाली निर्माण की राशि का उपयोग यदि वास्तव में किया गया है तो उसका परिणाम जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देता? आखिर हर बारिश में वही पानी सड़कों और घरों में क्यों भर जाता है? इन आरोपों और खर्च की गई राशि की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है। संबंधित पंचायत, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के अभिलेखों की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

ट्रांसफार्मर के पास जलभराव से गंभीर खतरा

सबसे गंभीर चिंता बिजली के ट्रांसफार्मर को लेकर है। जिस स्थान पर पानी जमा हो रहा है, उसके समीप विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले भी बिजली का चालू तार टूटकर गिरने की घटना सामने आ चुकी है। यदि जलभराव वाले क्षेत्र में किसी कारण से विद्युत करंट उतरता है तो पानी के माध्यम से आसपास के बड़े क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों की जान खतरे में पड़ सकती है। विशेष रूप से गढ़–नईगढ़ी मार्ग एक व्यस्त मार्ग है और इसके आसपास घनी बस्तियां हैं। लोगों की लगातार आवाजाही के कारण विद्युत सुरक्षा की अनदेखी किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

बड़ी दुर्घटना से पहले जिम्मेदारी तय करने की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल मौके का निरीक्षण करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि जल निकासी की पूरी व्यवस्था की तकनीकी जांच कराई जाए। ग्रामीणों की मांग है कि जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और संबंधित पंचायत स्तर के अधिकारी नालियों के निर्माण, स्वीकृत राशि, खर्च, निर्माण की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की गंभीरता से जांच कराएं। साथ ही यह भी जांच हो कि पिछले वर्षों में नाली निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी राशि खर्च की गई और वास्तव में मौके पर कितना काम हुआ। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले जागना जरूरी

ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का मौके पर पहुंचना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि पहले से मौजूद खतरे की पहचान कर उसका समाधान किया जाए। गढ़ तिराहे पर जलभराव, घरों में घुसता पानी और ट्रांसफार्मर के आसपास मौजूद विद्युत खतरा प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि अभी भी स्थायी जल निकासी और विद्युत सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



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