| बारिश में सड़ा गेहूं फिर पहुंचा गोदाम! शहडोल की खाद्यान्न व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल |
शहडोल - जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि रैक पॉइंट पर लगातार बारिश के कारण भीगकर खराब हुए सैकड़ों बोरे गेहूं को अलग सुरक्षित रखने या नियमानुसार निस्तारण करने के बजाय सीधे जयसिंहनगर गोदाम भेज दिया गया। इस मामले ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली, परिवहन व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, रैक पॉइंट पर खुले में रखे गेहूं के सैकड़ों बोरे लगातार बारिश की चपेट में आ गए। समय पर लोडिंग और सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं भीग गया। कई बोरों में रखा अनाज काला पड़ गया और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की बात सामने आई। इसके बावजूद इस गेहूं को खराब श्रेणी में चिह्नित करने या गुणवत्ता परीक्षण कराने के बजाय जयसिंहनगर गोदाम भेज दिए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या खराब गेहूं गोदाम भेजना नियमों के अनुरूप था?
खाद्यान्न भंडारण के निर्धारित नियमों के अनुसार यदि किसी कारणवश अनाज बारिश या अन्य कारणों से खराब हो जाता है तो उसका पंचनामा तैयार किया जाता है, गुणवत्ता परीक्षण कराया जाता है और नियमानुसार उसके निस्तारण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन किया गया? यदि नहीं, तो खराब गेहूं को गोदाम भेजने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया?
परिवहनकर्ता पर भी उठ रही उंगलियां
सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही परिवहनकर्ता की रही। यदि समय पर रैक से गेहूं की लोडिंग कर ली जाती तो अनाज बारिश में भीगता ही नहीं। परिवहन में हुई देरी के कारण सैकड़ों बोरे खुले में पड़े रहे और लगातार बारिश से खराब हो गए। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि इस नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय की जाएगी।
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
मामले में यह जानना भी आवश्यक है कि बारिश में खराब हुए गेहूं की क्षति का आकलन किया गया या नहीं। यदि सरकारी अनाज खराब हुआ है तो उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या संबंधित परिवहनकर्ता, रैक पॉइंट प्रबंधन या विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है? यदि नुकसान हुआ है तो क्या बीमा दावा किया जाएगा या सरकारी खजाने को ही इसका नुकसान उठाना पड़ेगा?
दस्तावेजों से सामने आएगा सच
सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले में रैक से लोडिंग, गोदामवार उठाव, गुणवत्ता परीक्षण, पंचनामा, जांच रिपोर्ट तथा संबंधित अधिकारियों के आदेशों से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई है। इन अभिलेखों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज प्रशासनिक लापरवाही थी या नियमों की अनदेखी कर खराब गेहूं को आगे भेजा गया।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले की जानकारी लेने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है तो विभाग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल रैक पॉइंट से जयसिंहनगर गोदाम तक कथित रूप से सड़ा गेहूं पहुंचने का मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, परिवहन एजेंसी और अन्य जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब सभी की निगाहें विभाग के आधिकारिक जवाब और संभावित जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।