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| मऊगंज में जल जीवन मिशन पर उठे गंभीर सवाल: धरातल पर केवल पाइप, टेंडर और अधूरे कार्य |
मऊगंज - रीवा से पृथक होकर बने नवीन जिला मऊगंज में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। जिस योजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को स्वच्छ एवं सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराना था, वह आज कई क्षेत्रों में केवल पाइप बिछाने, नए टेंडर जारी करने और निर्माण कार्यों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से योजना के नाम पर कार्य तो हो रहे हैं, लेकिन पेयजल की वास्तविक सुविधा अब भी अधिकांश गांवों तक नहीं पहुंच पाई है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विकासखंड गंगेव एवं मऊगंज जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्यों के हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पुनः टेंडर जारी किए जाने और नए निर्माण कार्य शुरू होने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर योजना का अंतिम लाभार्थी कौन है? क्या यह मिशन वास्तव में ग्रामीण जनता के लिए है या फिर केवल पाइप निर्माण कंपनियों, परिवहनकर्ताओं, ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों तक ही सीमित होकर रह गया है?
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से संचालित इस योजना में वर्षों से केवल निर्माण कार्य दिखाई दे रहे हैं, लेकिन घरों तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है। कई गांवों में पहले जो पानी अन्य स्थानीय व्यवस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था, वह भी बंद हो चुका है, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन की एक पानी की टंकी गिरने की घटना भी सुर्खियों में रही थी, जिसने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बावजूद अब तक न तो किसी व्यापक तकनीकी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है और न ही योजना की प्रगति एवं गुणवत्ता को लेकर कोई विस्तृत तथ्य जनता के सामने प्रस्तुत किए गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि मंचों से जल जीवन मिशन की उपलब्धियों का उल्लेख तो करते हैं, लेकिन उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर यह भी देखना चाहिए कि जिन परिवारों के लिए यह योजना बनाई गई थी, वे आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों को योजना के वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति का स्वयं निरीक्षण करना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जल जैसे जीवन से जुड़े विषय पर संबंधित विभाग के अधिकारी कितने संवेदनशील हैं? यदि योजना सफलतापूर्वक संचालित हो रही है, तो इसकी प्रगति रिपोर्ट, जलापूर्ति के वास्तविक आंकड़े और गुणवत्ता परीक्षण की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? पारदर्शिता के अभाव में ग्रामीणों के मन में अनेक शंकाएं उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
जल जीवन मिशन केवल निर्माण कार्यों का नाम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों ग्रामीणों के जीवन, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए आवश्यक है कि जिला प्रशासन, संबंधित विभाग एवं जनप्रतिनिधि संयुक्त रूप से योजना की जमीनी समीक्षा करें, निर्माण कार्यों का सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए तथा प्रत्येक गांव में वास्तविक जलापूर्ति की स्थिति को सार्वजनिक किया जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवीन जिला मऊगंज में जल जीवन मिशन वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में परिवर्तन ला पाता है या फिर यह योजना केवल कागजों, टेंडरों और अधूरे निर्माण कार्यों तक सीमित रह जाती है। इसका उत्तर आने वाला समय और प्रशासन की पारदर्शी कार्यशैली ही तय करेगी।
