![]() |
| कोरिया; ’समन्वय और सतत मॉनिटरिंग से आवासों के लक्ष्य समय पर होंगे पूरे’ |
कोरिया - जिले में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आवासों की प्रगति की समीक्षा हेतु जिला पंचायत कोरिया के मंथन कक्ष में बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशानुसार आयोजित समीक्षा बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने संबंधित अधिकारियों एवं मैदानी अमले को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत बचरा पोड़ी क्लस्टर में स्वीकृत 74 आवासों की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि इनमें से लगभग 60 आवास पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष आवासों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
सीईओ डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि हितग्राहियों को निर्माण कार्य के अनुरूप समय पर किश्तों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए जियो टैगिंग की प्रक्रिया नियमित रूप से की जाए। उन्होंने स्वीकृति एवं किश्त आबंटन की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। समीक्षा के दौरान प्रथम किश्त, द्वितीय किश्त एवं पूर्ण हुए आवासों की स्थिति पर चर्चा की गई। उन्होंने आवास मित्रों, पंचायत सचिवों, रोजगार सहायकों एवं तकनीकी सहायकों को प्रतिदिन हितग्राहियों से संपर्क बनाए रखने और निर्माण कार्य में आ रही समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि सभी योजनाओं के शत-प्रतिशत लक्ष्य समय सीमा में प्राप्त करने के लिए विभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़े सभी मैदानी कर्मचारियों को आपसी सहयोग और नियमित संवाद के साथ कार्य करने की सलाह दी, ताकि जिले को प्राप्त लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। दोनों जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की तकनीकी टीम, आवास एवं मनरेगा शाखा के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित इस बैठक में उपस्थित रहे।
आजतक 24 के प्रशासन से सवाल
1. बचरा पोड़ी क्लस्टर में 74 में से लगभग 60 आवास पूर्ण होने की बात कही गई है। शेष 14 आवास अब तक अधूरे क्यों हैं? क्या देरी की वजह प्रशासनिक लापरवाही, किश्तों के भुगतान में विलंब या निर्माण सामग्री की समस्या है, और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय की गई है?
2. हितग्राहियों को समय पर किश्त भुगतान के लिए जियो टैगिंग पर जोर दिया जा रहा है। जिले में ऐसे कितने मामले हैं जहां जियो टैगिंग या तकनीकी त्रुटियों के कारण पात्र हितग्राहियों की किश्तें रुकी हुई हैं, और उन्हें राहत देने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है?
3. सरकारी बैठकों में अक्सर आवास पूर्ण होने के आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं, लेकिन कई जगह लाभार्थी अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं। क्या जिला प्रशासन पूर्ण घोषित किए गए आवासों का थर्ड पार्टी भौतिक सत्यापन कराएगा और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके?
